किसानों विरोध के कारण तीसरी बाहरी रिंग रोड का सर्वेक्षण रुका
लोकवाहिनी, संवाददाता
रामटेक। थर्ड आउटर रिंग रोड परियोजना से प्रभावित होने वाले नौ तहसीलों के किसानों के संगठन शेतकरी संघर्ष सेना की ओर से आज पारशिवनी तहसील के बोरी (रानी) गांव में शुरू की जाने वाली माप-जोख प्रक्रिया का जोरदार विरोध किया गया। माप-जोख के लिए रामटेक के उपविभागीय अधिकारी, पारशिवनी के तहसीलदार, पटवारी, कोतवाल, पुलिस पाटील के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल और दंगा नियंत्रण दल की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद प्रभावित किसानों शेतकरी संघर्ष सेना के नौ तहसीलों के प्रतिनिधियों तथा बलिराजा शेतकरी संगठन के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर माप-जोख प्रक्रिया का विरोध किया। किसानों के कड़े विरोध के कारण प्रशासन को भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू किए बिना ही पीछे हटना पड़ा। विरोध प्रदर्शन में किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधि ओमप्रकाश काकड़े, राहुल वानखेड़े, सारंग जाड़े, संतोष ठाकरे, रोशन ताड़स, सुधाकर उमाले, राज ठाकरे, लक्ष्मीकांत काकड़े, भोजराज काकड़े, वाडीभस्मे, भरत तिरोडे, मंगर, पिंटू येरने समेत बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
आज होगी जिलाधिकारी के साथ संयुक्त बैठक
किसानों के तीव्र विरोध को देखते हुए रामटेक के एसडीओ प्रियेश महाजन ने जिलाधिकारी से चर्चा की। इसके बाद जिलाधिकारी, नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकारियों, शेतकरी संघर्ष सेना के प्रतिनिधिमंडल और प्रभावित किसानों के बीच आज संयुक्त बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में किसानों की विभिन्न मांगों, थर्ड आउटर रिंग रोड परियोजना से जुड़ी जानकारी, माप-जोख की प्रक्रिया तथा किसानों को दिए जाने वाले उचित और न्यायसंगत मुआवजे के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। किसानों का कहना है कि परियोजना के लिए उनकी जमीन प्रभावित होने की स्थिति में उन्हें पूरी जानकारी देकर और विश्वास में लेकर ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
पारदर्शिता और उचित मुआवजे की मांग
शेतकरी संघर्ष सेना की स्पष्ट और ठोस मांग है कि किसानों को विश्वास में लेकर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जाए। साथ ही, जब तक किसानों के लिए उचित और न्यायसंगत मुआवजा तय नहीं हो जाता तब तक जमीन की माप-जोख प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। किसानों ने प्रशासन से उनकी समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार करने तथा उचित समाधान निकालने की मांग की है।












