हिम्मत है, तो किसी एक विद्यार्थी के बाल को हाथ लगाकर दिखाओ; रोहित पवार की ओर से खुली चुनौती
लोकवाहिनी, संवाददाता
पुणे। विद्यार्थी कोई एंटी सोशल अर्थात समाजविघातक नहीं हैं। आंदोलन करना विद्यार्थियों का अधिकार है। पुणे में शिक्षा के लिए आने वाले विद्यार्थियों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा होता है, न कि आंदोलन करना। आप विद्यार्थियों का विश्वास फिर से हासिल करने के लिए ईमानदार प्रयास करें, प्रत्येक विद्यार्थी को उचित अवसर मिलना चाहिए, ऐसा कहते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में निर्देश दिए। दूसरी ओर हाईकोर्ट ने विद्यार्थियों से आंदोलन वापस लेने और अपनी पढ़ाई में लग जाने की अपील की है। इस बीच, विधायक रोहित पवार ने कहा है कि वे आंदोलन पर अड़िग हैं। हम किसी भी परिस्थिति में विवेक भीमवार के इस्तीफा दिए बिना अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। हमें यहां से हटाकर दिखाओ, ऐसी चुनौती रोहित पवार ने सरकार को दी। हिम्मत हो तो विद्यार्थियों के बाल को हाथ लगाकर दिखाओ, ऐसी चेतावनी भी रोहित पवार ने दी।
अदालत ने अनुमति के संदर्भ में पूछताछ की है। इस संदर्भ में बोलते हुए रोहित पवार ने कहा कि 2 अक्टूबर को हमें अनुमति दी गई है, इसलिए आपको उस पत्र को मानकर निर्णय लेना होगा, हम यहां से नहीं हटेंगे। रोहित पवार ने कहा कि दो फैसले लेने के अधिकार सरकार के पास है। एक मित्र को घर भेजना या पुलिस के माध्यम से विद्यार्थियों पर अत्याचार करना। इसलिए मित्र का पक्ष न लेते हुए मित्र को घर भेजें, विद्यार्थियों पर अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे, ऐसी चेतावनियों भी उन्होंने दीं। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता ने ही हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इतना ही नहीं बल्कि भाजपा की ओर से ही इस आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। अब सीधे अतुल सावे के इस्तीफे की मांग रोहित पवार ने की।
इस मामले में अगली सुनवाई अब 25 नवंबर को है। आंदोलन वापस लेता हूँ, ऐसा कहा था लेकिन उन्होंने इसे वापस नहीं लिया, ऐसा बड़ा दावा कोर्ट में सरकारी वकीलों ने किया। आगे बोलते हुए रोहित पवार ने कहा कि सरकार से कहिए दोस्त का पक्ष मत लीजिए। सरकार को सिर्फ दोस्त का पक्ष लेना है। अध्यक्ष का इस्तीफा लेना जरूरी है। यह याचिकाकर्ता किसका कार्यकर्ता है यह मुझे पता है। इन गरीब लोगों के लिए कौन लड़ेगा? हमारे पास यहां मंत्री नहीं आते हैं। मंत्री दूसरी जगह आते हैं। हमारे आंदोलन को 7 दिन हो गए और आज महाज्योति की परीक्षा में घोटाला हुआ। आप विद्यार्थियों के साथ प्यार से बात कीजिए सरकार से नहीं। इस अध्यक्ष को घर भेजा जाना चाहिए। कोर्ट एमपीएससी के विषय में कुछ भी नहीं कर सकता। अगर कर सकता है तो सुप्रीम कोर्ट कर सकता है। एमपीएससी के अध्यक्ष को कोर्ट घर नहीं भेज सकता। हमारी सबसे बड़ी मांग अध्यक्ष को घर भेजना है।
आंदोलन में रोहित पवार के कार्यकर्ताओं की नाइट लाइफ : नवनाथ बन
मुंबई में एमपीएससी आंदोलन में रोहित पवार के कार्यकर्ताओं की रात की गतिविधियों को लेकर भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने पुणे में चल रहे एमपीएससी छात्रों के आंदोलन को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि रोहित पवार के नेतृत्व वाला यह आंदोलन रात की गतिविधियों और देर रात की गुंडागर्दी में लिप्त है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नवनाथ बन ने मीडिया को कुछ कथित वीडियो फुटेज भी दिखाए। नवनाथ बन का कहना है कि प्रदर्शन स्थल पर देर रात शराब पीने और दंगा करने की घटनाएं हो रही हैं। नवनाथ बन ने कहा कि हम पहले दिन से तो कहते आ रहे हैं कि रोहित पवार का यह आंदोलन पूरी तरह से राजनीतिक हफ्ता है।
रोहित पवार इसे विद्यार्थी आंदोलन कह रहे हैं, लेकिन असलियत यह है कि आंदोलन के नाम पर वहां अराजकता फैलाई जा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार और भाजपा एमपीएससी की तैयारी कर रहे मेहनती और ईमानदार विद्यार्थियों का पूरा सम्मान करते हैं। इसी वजह से राज्य के मुख्यमंत्री ने स्वयं विद्यार्थियों प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया। लेकिन मांगें स्वीकार होने के बाद भी रोहित पवार आंदोलन के नाम पर माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए नवनाथ बन ने कुछ लोगों का जिक्र किया और उन्हें रोहित पवार का करीबी बताया। उन्होंने कहा कि यदि आप इस वीडियो को ध्यान से देखेंगे तो इसमें कुछ बेहद महत्वपूर्ण चेहरे नजर आएंगे, जो सीधे तौर पर रोहित पवार से जुड़े हैं। शिवराज मोरे, जो शुरू से ही रोहित पवार के साथ रहा है, वह 3 और 4 अक्टूबर की दरमियानी रात को आंदोलन स्थल पर मौजूद था। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने आगे आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल से निकलने के बाद शिवराज मोरे कारेसराज पार्क इलाके की तरफ गया। वहां उसने कांग्रेस के दो कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर शराब पी। इसके बाद सड़क पर गुंडागर्दी की गई और एक लड़की के साथ विवाद भी किया गया। नवनाथ बन ने पूछा कि क्या यही युवा आंदोलनकारियों के नेताओं का चाल-चरित्र है? रोहित पवार, क्या यही आपकी असली ‘नाइट लाइफ’ है? रोहित पवार को जनता को जवाब देना चाहिए कि शिवराज मोरे और उस लड़की के बीच क्या संबंध है?













