नीतेश राणे को बताया ‘हिंदुत्व का नया मुल्ला’
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। संजय राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे को बार-बार कभी गोवा तो कभी दिल्ली जाना पड़ता है और अमित शाह के पीछे भागना पड़ता है। ऐसे में भाजपा में विलय उनके लिए बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिंदे गुट की विचारधारा एक हो सकती है, लेकिन बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना और ठाकरे गुट की विचारधारा में अंतर है। उन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे की अपनी कोई पार्टी नहीं, बल्कि केवल एक गुट है। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे भरोसेमंद नहीं हैं। राउत ने सवाल किया कि जब शिंदे बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नहीं हैं, तो वे मनोज जरांगे के कैसे हो सकते हैं?
सांसद संजय राउत नागपुर हवाई अड्डे पर मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में देवेंद्र फडणवीस ने 10 साल तक शासन किया है। वे एक महान गृह मंत्री हैं। फिर भी, पेपर लीक जैसी घटनाओं से बच्चों का जीवन बर्बाद हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि नीट, एमपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक रैकेट में भाजपा कार्यकर्ता शामिल हैं। पुणे और लातूर से यूपीएससी मामले में पकड़े गए आरोपी भाजपा से जुड़े हैं। अब एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स जिले-जिले का दौरा करेगी। जिले में पुलिस की कमी, सरकारी व्यवस्था की कमी का सवाल उठाते हुए राउत ने आरोप लगाया कि एक व्यवस्था पर दूसरी थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग को भंग कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया और परीक्षा को व्यापक तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए।
नीतेश राणे उठाते थे राहुल गांधी के जूते
राउत ने कहा कि ये वही लोग हैं जो पहले राहुल गांधी के जूते उठाते थे। एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में राणे ने राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को ‘शरिया की गूंज’ कहा था। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी हिंदुओं और सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। संजय राउत ने मंत्री नीतेश राणे के गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम की भागीदारी को लेकर दिए गए बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। राउत ने नीतेश राणे पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘हिंदुत्व का नया मुल्ला’ बताया। राउत ने कहा कि नीतेश राणे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और जोर-जोर से अपनी बात कह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राणे पहले राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ को ‘हाफ चड्ढीवाला’ कह चुके हैं और वीर सावरकर को ‘माफीवीर’ कहने वालों में भी उनका नाम रहा है। राउत ने सवाल किया कि ऐसे में वे अब लोगों को हिंदुत्व का पाठ कैसे पढ़ा सकते हैं?
मंत्रियों जैसी भाषा बोलें
राउत ने कहा कि नीतेश राणे मंत्री हैं और उन्हें मंत्री पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे दंगे भड़कने जैसी स्थिति पैदा हो। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नीतेश राणे की हिंदुत्व संबंधी भूमिका को देश के शंकराचार्यों की मंजूरी है या नहीं। राउत ने उन्हें नागपुर आकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से चर्चा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदुत्व को लेकर अलग बात कही थी, जबकि राणे की भाषा अलग है।
मंदिर को नहीं छोड़ा तो छात्रों को कैसे छोड़ेंगे
भाजपा शासित राज्य में दान पेटियां चोरी हो रही हैं, स्कूलों में लूटपाट हो रही है। अब एयर मार्शल को मुखिया बना दिया गया है। पहले पुजारी सब कुछ देख रहे थे। एयर मार्शल समेत बड़े-बड़े अधिकारियों को वहां बिठा दिया गया है। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि राम मंदिर को भी नहीं बख्शा गया, तो छात्रों को कैसे बख्शा जाएगा?












