नाबालिगों को तुरंत रिहा करे सरकार : छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 साल से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। शीर्ष अदालत ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हाल ही में देश भर में हुए आंदोलन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत संभालकर रखें। अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर या किसी भी राज्य में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह राहत केवल निर्दोष छात्रों के लिए है। कोर्ट ने बेकसूरों और नाबालिगों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। वहीं, जिन लोगों का पुराना आपराधिक बैकग्राउंड है, उनके खिलाफ केस वापस नहीं होंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह फैसला सुनाया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज से पहचाने गए 2873 प्रदर्शनकारियों में से 989 लोगों का आपराधिक इतिहास पाया गया। इन लोगों पर हत्या, डकैती, लूट, यौन उत्पीड़न, अपहरण और अन्य अपराधों के मामले शामिल हैं। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पैलेट गन-इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल का भी जिक्र किया।
बात हमें मंजूर नहीं : सौरभ दास
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजीपी) के प्रवक्ता सौरभ दास ने मंगलवार को कहा कि उन्हें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार लोगों की रिहाई को लेकर आज लिखित गारंटी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, हमारी मांग थी कि सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहमति भी जताई गई थी। अगर सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि जिनके ऊपर पहले से एफआईआर हैं, उन्हें मत छोड़िए तो ये हमें मंजूर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के छात्रों को रिहा किया जाए, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो।












