लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। पेपर लीक से जुड़ा सख्त संशोधन विधेयक लोकसभा के बाद अब राज्यसभा (रास) में भी गुरुवार को पारित कर दिया गया। वहीं वंदे मातरम् बिल राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पास हो गया है। अब यह दोनों विधेयकों को कानून बनने में राष्ट्रपति के मंजूरी का इंतजार है। सदन में इस दौरान काफी हंगामा हुआ। स्पीकर ने इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। पेपर लीक से जुड़ा सख्त संशोधन विधेयक के इस नए कानून में दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान शामिल है। सामान्य मामलों में 5 से 10 साल की कैद और संगठित अपराध या सिंडिकेट के लिए 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना। समय-सीमा : जांच को 2 महीने के भीतर पूरा करना होगा और त्वरित अदालतों द्वारा मुकदमों का निपटारा किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और नकल तथा पेपर लीक की वारदातों पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। हालांकि जब सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जवाब देने के लिए खड़े हुए, तब विपक्ष वॉॉकआउट कर गया। इससे पहले राज्यसभा में चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। आरजेडी सांसद मनोज झा ने एंटीए को खत्म करने की मांग करते हुए कहा कि इसे बंगाल की खाड़ी में फेंक दिया जाए। इससे पहले, लोकसभा में बुधवार को करीब 7 घंटे बहस के बाद पेपर लीक से जुड़ा बिल पारित हो गया था। राज्यसभा में करीब 8 घंटे की चर्चा और बहस के बाद एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पास हो गया। रात 8.15 मिनट तक चली कार्रवाई के बाद राज्यसभा 31 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं इससे पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के अपमान को क्रिमिनल अपराध बनाने वाले विधेयक को पारित कर दिया। यह बिल- द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026 एक दिन पहले ही राज्यसभा से पास हो चुका था।
लोकसभा में इसके पारित होने के साथ, प्रस्तावित संशोधन अब कानून बनने के करीब पहुंच गया है। लोकसभा में, विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच बिल को ध्वनि मत से पारित किया गया, जो नीट पेपर लीक का विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहे थे। सदन में कानूनी काम होते रहे के बावजूद शोर-शराबा जारी रहा। यह कानून राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम एक्ट, 1971 में बदलाव करके राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को इसके दायरे में लाने की कोशिश करता है। अभी, यह कानून संविधान, राष्ट्रीय झंडे और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने पर तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।













