सैंकड़ों संत-महंतों की उपस्थिति में गोदान परंपरा को किया गया पुनर्जीवित
लोकवाहिनी संवाददाता
मानोरा। बंजारा समाज की काशी के नाम से प्रसिद्ध श्रीक्षेत्र पोहरादेवी में दीपावली के प्रथम दिन वसुबारस के पावन अवसर पर भव्य एवं ऐतिहासिक गोदान और गोपूजन महासमारोह बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। आद्य गोरक्षक संत सेवालाल महाराज की गोदान परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से 5 नवंबर को दोपहर 3 बजे सैंकड़ों संत-महंतों की प्रमुख उपस्थिति में इस भव्य आयोजन का आयोजन किया गया। समारोह का शुभारंभ धर्मगुरु एवं विधायक बाबुसिंग महाराज के हाथों वसुबारस के शुभ मुहूर्त पर गोमाता के पूजन के साथ हुआ। इसके पश्चात संत रामराव महाराज मंदिर में महाआरती एवं अरदास की गई।
इस अवसर पर देवी बापू भक्त महंत शेखर महाराज ने भोग अर्पित किया। गोदान संवाद विचारपीठ पर भागवत महर्षि संत मनीष भाईजी (भागवत धाम), आचार्य विष्णु महाराज (मध्य प्रदेश), विष्णु गिरी महाराज (महामंडलेश्वर), रामदास महाराज (गराशागड़), अंकुशानंद महाराज (बासर), प्रेमचंद महाराज (वृंदावन धाम), बंडू महाराज दापेकर, जगदीश भारती, कैलास महाराज, शेखर महाराज पिंपलगांव, गोवर्धन राठौड़ (आर्णी), पंकज महाराज, भाजपा नेता देवीदास राठौड़, मंगल नायक (उत्तर प्रदेश), रतन नायक (तेलंगाना), महंत सुनील महाराज, शेखर महाराज, संजय महाराज एवं भक्तराज महाराज राठौड़ सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। इस दौरान उपस्थित संतों, महंतों एवं श्रद्धालुओं ने गोमाता की रक्षा और गोवंश के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। धर्मगुरु बाबुसिंग महाराज सहित संत-महंतों ने अपने मार्गदर्शन में कहा कि सनातन धर्म में गोमाता का विशेष महत्व है।
गोमाता में समस्त देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को गोवंश की रक्षा, पालन-पोषण एवं संवर्धने के लिए आगे आना चाहिए। गोसेवा और गोपालन आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसके बाद राज्य में पहली बार आयोजित ऐतिहासिक गोदान समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर कोली, साई (इजारा) एवं तुलशीनगर के गोपालकों ने संगीत की धुन पर गायों को घोंगड़ी (कंबल) पर बैठाकर अनोखा प्रदर्शन किया। इस अनूठे प्रात्यक्षिक ने उपस्थित गोप्रेमियों और श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। बंजारा संस्कृति और गोवंश का संबंध प्राचीन काल से ही अटूट रहा है। वसुबारस के पावन पर्व पर गोदान का संकल्प पूरा कर गोसेवा, गोसंवर्धन एवं गोरक्षण का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रहा। समारोह के उत्तरार्ध में भव्य महादीपोत्सव मनाया गया।













