सर्वदलीय बैठक में सरकार ने की सहयोग की अपील
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। 20 जुलाई यानी सोमवार से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र के काफी हंगामेदार होने के आसार हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले सत्ताधारी राजग और विपक्षी दलों, दोनों ने अपनी कमर कस ली है। राजग का जोर जहां इस सत्र में आयकर संशोधन, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक और सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक सहित सात अहम बिलों को पारित कराने पर रहेगा। वहीं, विपक्ष नीट-यूजी पेपर लीक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सत्तापक्ष को घेरने की पूरी रणनीति तैयार किए बैठा है।
विपक्षी दलों ने संसद का मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी, पेपर लीक, एथनॉल और कई अन्य विषयों पर चर्चा की मांग उठाई, जबकि सरकार ने उनसे दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील करते हुए कहा कि हंगामे से सिर्फ देश का नहीं, बल्कि ऐसा करने वाली पार्टियों को भी नुकसान होता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि सत्र के लिए आठ विधेयकों को सूचीबद्ध किया गया और यदि कोई अतिरिक्त विधायी कामकाज होगा, उस बारे में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में चर्चा होगी तथा राजनीतिक दलों को सूचित किया जाएगा। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कई अन्य विपक्षी दलों ने दो टूक कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन वे इसकी आड़ में किए जाने वाले परिसीमन के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) में बगावत से संबंधित मामलों को लेकर संपूर्ण विपक्ष ने बैठक से कुछ देर के लिए बहिर्गमन किया।











