गैस प्राधिकरण और राष्ट्रीय रसायन एवं उर्वरक निगम के बीच समझौता
लोकवाहिनी, संवाददाता
सावनेर। सावनेर में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से गैस आधारित उर्वरक परियोजना स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गैस प्राधिकरण (GAIL) और राष्ट्रीय रसायन एवं उर्वरक कंपनी (RCF) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के साथ गति मिली है। दावा किया गया है कि यह परियोजना, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 12.70 लाख मैट्रिक टन यूरिया है, विदर्भ के किसानों को उर्वरक की आपूर्ति में सुविधा प्रदान करेगी और हजारों रोजगार सृजित करेगी।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में गेल के कार्यकारी निदेशक (व्यावसायिक विकास एवं नवप्रवर्तन) संजय अग्रवाल व आरसीएफ की कार्यकारी निदेशक (परियोजना, निगमित एवं समन्वय) ज्योति पाटिल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर गेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता तथा आरसीएफ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस. शिवकुमार उपस्थित रहे। दोनों संस्थाओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ विदर्भ के औद्योगिक विकास को नई गति देगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करेगी। सावनेर परियोजना का चयन करते समय प्राकृतिक गैस पाइपलाइन की उपलब्धता, प्रचुर मात्रा में पानी, परिवहन सुविधाएं, औद्योगिक विकास की क्षमता और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं जैसे कारकों पर विचार किया गया था। यह परियोजना मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन मार्ग पर स्थापित की जाएगी। यह परियोजना एक विशेष प्रयोजन कंपनी के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। पहले चरण में, 12.70 लाख मैट्रिक टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता वाला अत्याधुनिक यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य घरेलू उर्वरक उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
विधायक देशमुख नई क्या था प्रयास
परियोजना के लिए सावनेर का चयन विधायक डॉ. आशीष देशमुख के लगातार प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। वर्ष 2023 से वे इस परियोजना को विदर्भ में लाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन-उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा गेल के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष सावनेर की उपयुक्तता का पक्ष रखा।











