लाभार्थी महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 65 लाख 66 हजार 164
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। मुख्यमंत्री लाडली बहन योजना में लाभार्थी महिलाओं की संख्या में बड़ी कमी होने की जानकारी सामने आई है। योजना की जांच और ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थी महिलाओं की संख्या में पूरे 92.10 लाख की कमी होने की बात कही जा रही है। शुरुआत में इस योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या करीब 2 करोड़ 48 लाख थी। अब यह संख्या 1 करोड़ 65 लाख 66 हजार 164 रह गई है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह योजना शुरू की। पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का प्रावधान इस योजना में किया गया था। योजना शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसके लिए आवेदन किया। इस योजना को पूरे राज्य से बड़ी प्रतिक्रिया मिली। हालांकि बाद में लाभार्थियों की संख्या और पात्रता को लेकर सवाल उठने लगे। पिछले कुछ महीनों से सरकार की ओर से लाभार्थियों की जांच की जा रही है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया और विभिन्न मानदंडों की जांच के बाद कई लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। इसलिए योजना के लाभार्थियों की संख्या में इतनी बड़ी कमी देखने को मिल रही है। आय की सीमा, सरकारी नौकरी या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ, परिवार के सदस्यों की पात्रता तथा ई-केवाईसी से संबंधित त्रुटियों जैसे विभिन्न कारणों से कुछ लाभार्थी अपात्र हुए होने की संभावना है। पात्र लाभार्थियों तक ही सरकारी सहायता पहुंचे और धन का दुरुपयोग न हो, यही सरकार का उद्देश्य बताया जा रहा है। इस बीच 92 लाख से अधिक महिलाओं को अपात्र ठहराए जाने के कारण योजना के क्रियान्वयन और जांच प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा होने की संभावना है। इस योजना पर राज्य के खजाने पर बड़े पैमाने पर धन खर्च किया जाता है। रक्षाबंधन नजदीक आने के कारण जुलाई और अगस्त की दो किस्ते एक साथ मिलने की संभावना है। इसलिए लाडली बहन योजना को 3000 रुपये की राशि मिलने की बात समझी जा रही है।
हालांकि तीन हजार रुपये एक साथ जमा होने को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है। ई-केवाईसी और पात्रता जांच के बाद लाभार्थियों की संख्या में बड़े पैमाने पर कमी आई है। इसलिए अगली किस्त केवल पात्र ठहराई गई और ई-केवाईसी पूरी कर चुकी महिलाओं के खातों में ही जाने की संभावना है। विधानसभा चुनाव 2024 से पहले शुरू की गई इस योजना में शुरुआत में करीब 2.48 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था। चुनाव की घोषणा से ऐन पहले भाजपा सरकार ने इस योजना को शुरू करने की घोषणा कर योजनाओं का लाभ देना शुरू कर दिया था। चुनाव में भाजपा जीती और फिर लाभार्थियों की जांच शुरू हुई। फिर पता चला कि इसमें बड़ी संख्या में पुरुषों, ज्यादा आय वाली महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों ने भी लाभ लेना शुरू कर दिया था। इनके नाम काटे जाने लगे। बाद में सरकार ने ई-केवाईसी की शर्त रखी। और अब ई-केवाईसी नहीं किए जाने के बाद बड़ी संख्या में लाभार्थियों के नाम काट दिए गए। सत्यापन अभियान के बाद अब यह संख्या घटकर लगभग 1.5 करोड़ रह गई है। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष आयु की उन महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है।
अपात्रता का कारण क्या?
ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण नहीं किए – 62,00,000
वार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक – 16,00,000
ई-केवाईसी के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी (स्वयं-घोषणा द्वारा) – 4,42,000
संजय गांधी निराधार योजना (SGNY) का लाभ पहले से ले रहे हैं – 3,60,000
एक ही परिवार में दो से अधिक लाभार्थी – 2,50,000
65 वर्ष की आयु सीमा से अधिक उम्र – 80,000
जिला स्तर पर सत्यापन में बाहर किए गए – 1,70,000
सरकारी कर्मचारी के रूप में पहचान की गई – 8,000
कुल अनुमानित कटौती – 92,10,000
योजना में ई-केवाईसी महत्वपूर्ण मुद्दा था : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज एकल विवाह के कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इसके बाद उन्होंने मीडिया से संवाद किया। लाडली बहन योजना, वंदे मातरम इस विषय पर उन्होंने अपने विचार रखे। 92 लाख लाडली बहनें अपात्र ठहराई गईं, इस सवाल पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया है। हररोज वही-वही खबर कुछ लोग देते हैं। उसकी चर्चा करते हैं। कुछ नियम और मानदंड थे, उसकी जांच कैग द्वारा होती है। एक भी पैसा मानदंड के बाहर जाकर नहीं दिया जाता। हमने योजना शुरू की। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर दो-चार महीनों में जांच संभव नहीं थी। इसलिए उसके बाद जांच शुरू की। ई-केवाईसी उसमें महत्वपूर्ण मुद्दा था। कुछ लोग नियमों के बाहर जाकर लाभ ले रहे थे। बार-बार अवसर देने के बावजूद ई-केवाईसी नहीं किया। 1 करोड़ 65 लाख बहनों ने ई-केवाईसी की। वे पात्र ठहरीं। उन्हें पैसे मिल रहे हैं। बिना रुकावट के पैसे मिल रहे हैं। लाखों बहनों का इनकम टैक्स पेयी परिवार है। इनकम टैक्स पेयी परिवार नहीं चलता। जिन बहनों को आधार की, मदद की जरूरत है, जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। उनके लिए यह योजना है। जो पुरुष लाभार्थी थे, उन पर कार्रवाई कर रहे हैं। जो सरकारी कर्मचारी थीं, सभी ने अप्लाई किया, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी पड़ेगी। आज का जो आंकड़ा है, वह 100 प्रतिशत वेरीफाइड आंकड़ा है। हमारी सरकार रहने तक उन्हें पैसे मिलेंगे। अब जो कांग्रेस वाले बोल रहे हैं, वही लाडली बहनों के खिलाफ हाईकोर्ट गए थे।












