तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और कर्जदारों से जुड़े परिसरों की तलाशी
यवतमाल में नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
लोकवाहिनी संवाददाता
यवतमाल। बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक में करीब 242 करोड़ रुपये के कथित आर्थिक अनियमितताओं और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच में गुरुवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई विभाग की टीम ने यवतमाल जिले में करीब नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इन परिसरों में बैंक के तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और कुछ कर्जदारों से जुड़े ठिकाने शामिल होने की जानकारी सामने आई है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच का हिस्सा है।
बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक में कथित आर्थिक अनियमितताओं को लेकर यवतमाल के अवधूतवाड़ी पुलिस थाने में विभिन्न मामले दर्ज हैं। इन्हीं मामलों के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, बैंक द्वारा दिए गए कर्ज, कर्ज की राशि के कथित दुरुपयोग और उसके बाद हुए वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कर्ज के रूप में वितरित धन का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और उसका अंतिम लाभ किसे मिला। बैंक में कथित अनियमितताओं और जमाकर्ताओं के पैसों के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने बैंक का विशेष ऑडिट कराया था।
ऑडिट में बैंक के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अध्यक्ष, संचालक और अन्य अधिकारियों पर कर्जदारों, मूल्यांकनकर्ताओं तथा ऑडिटरों के साथ कथित मिलीभगत कर नियमों का उल्लंघन करते हुए कर्ज वितरित करने के आरोप सामने आने की बात कही गई थी। जांच के अनुसार, कई कर्ज मामलों में पर्याप्त गारंटी के बिना कर्ज मंजूर किए जाने तथा कर्जदारों की भुगतान क्षमता का उचित आकलन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी। विशेष ऑडिट में बैंक के माध्यम से करीब 242 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया था। इस मामले में वर्ष 2024 में बैंक के तत्कालीन संचालक मंडल के सदस्यों सहित अधिकारियों, कर्मचारियों, कर्जदारों, मूल्यांकनकर्ताओं और ऑडिटरों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। ईडी की जांच में इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि बैंक से कर्ज के रूप में वितरित राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य जगह तो नहीं किया गया। जांच में नकद निकासी, पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नए कर्ज का इस्तेमाल यानी ‘लोन एवरग्रीनिंग’ और बैंक से जुड़े कुछ लोगों के खातों में राशि स्थानांतरित किए जाने जैसे लेन-देन की भी जांच की जा रही है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन कथित लेन-देन से वास्तविक लाभ किसे मिला और धन की अंतिम आवाजाही कहां तक हुई।
आरबीआई ने 2022 में रद्द किया था बैंक का लाइसेंस
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 11 नवंबर 2022 को बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसके बाद बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
बैंक में कथित आर्थिक अनियमितताओं की जांच आर्थिक अपराध शाखा द्वारा भी की जा रही थी। विशेष ऑडिट के निष्कर्षों के आधार पर पुलिस में मामले दर्ज होने के बाद अब इसी प्रकरण से जुड़े वित्तीय लेन-देन की कड़ी ईडी की जांच के दायरे में है।
छापेमारी के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
गुरुवार को हुई छापेमारी के दौरान ईडी ने कौन-कौन से दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड या अन्य सामग्री जब्त की, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, 242 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता से जुड़े वित्तीय लेन-देन, कर्जदारों और बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के बीच कथित संबंध तथा धन के अंतिम इस्तेमाल की जांच अब ईडी द्वारा की जा रही है। छापेमारी से जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और आगे ईडी की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।













