रबी फसल और मछली व्यवसाय पर संकट
मानोरा। तालुका क्षेत्र में इस वर्ष बारिश में लंबे अंतराल के कारण लघु सिंचाई तालाबों में महज 20 से 30 प्रतिशत पानी ही बचा है। कम जलसंग्रह के कारण आगामी रबी मौसम में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने की संभावना बेहद कम है। इससे किसानों के साथ-साथ खेत मजदूरों पर भी आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। वहीं, तालाबों में छोड़े गए मछली बीज को पक्षियों द्वारा खाए जाने और कम पानी के कारण मछली व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।
मानोरा तालुका में लघु सिंचाई विभाग और जिला परिषद के करीब 25 लघु सिंचाई तालाब हैं। इन तालाबों पर किसानों की रबी फसल के साथ-साथ मछली पालन और पशुओं के लिए पानी की जरूरत भी निर्भर रहती है। इस वर्ष अगस्त और सितंबर में बारिश का अभाव रहने से तालाबों में अपेक्षित जलसंचय नहीं हो सका। वर्तमान में अधिकांश तालाबों में केवल 20 से 30 प्रतिशत पानी शेष है। जलसाठा कम होने से किसानों को रबी मौसम में सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल होगा। ऐसे में कई किसानों को रबी की फसल से वंचित रहना पड़ सकता है। खेती का क्षेत्र कम होने पर खेत मजदूरों के लिए भी रोजगार के अवसर घटेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका है। तालाबों में मछली पालन करने वाली संस्थाओं की ओर से सामान्यतः जुलाई महीने में मछली बीज छोड़ा जाता है। लेकिन इस वर्ष पर्याप्त बारिश नहीं होने से तालाबों का जलस्तर लगातार कम हुआ है। इसके अलावा तालाबों में छोड़े गए मछली बीज को पक्षियों द्वारा खाए जाने की समस्या भी सामने आ रही है। कम पानी और मछली बीज के नुकसान से मछुआ समुदाय के व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।
पशुओं के लिए पानी की चिंता
तालाबों में सीमित पानी उपलब्ध होने के कारण आने वाले दिनों में पशुओं के लिए पीने की पानी की समस्या भी गंभीर हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के सामने पानी उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ने की आशंका है। प्रशासन की ओर से नागरिकों से पानी का अपव्यय रोकने और उपलब्ध जल का उपयोग अत्यंत सावधानी एवं मितव्ययता से करने की अपील की जा रही है। आगामी दिनों में जलसंकट की स्थिति को देखते हुए किसानों और ग्रामीणो को पानी का नियोजन कर उपयोग करने की आवश्यकता है।













