आरबीआई के संकेत- आगे कीमतें और बढ़ेंगी
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत ब्याज दर रेपो को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल में यह रेपो दर में पहली बढ़ोतरी है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने महंगाई बढ़ने और रुपये की विनिमय दर में गिरावट के साथ नीतिगत रुख बदलते हुए आने वाले समय में भी दर बढ़ाने के संकेत दिए। रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई के रेपो दर बढ़ाने से आवास, वाहन समेत अन्य कर्ज महंगे होंगे। मौजूदा कर्जदारों की मासिक किस्त भी बढ़ सकती है।
छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर बढ़ाने के पक्ष में फैसला किया। दिसंबर, 2024 में गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद यह पहला मौका है जब नीतिगत दर बढ़ायी गयी है। यह फैसला हालांकि व्यापक रूप से अपेक्षित था, लेकिन केंद्रीय बैंक का अपने नीतिगत रुख को तटस्थ से बदलकर ‘सूझ-बूझ के साथ सख्त’ करने का निर्णय कुछ हद तक चौकाने वाला है। इससे निकट अवधि में दर में कटौती की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। मल्होत्रा ने सोमवार से शुरू तीन दिन की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करते हुए कहा, निकट अवधि में नीतिगत दर में कटौती का विकल्प नहीं है और आगे की नीतिगत कार्रवाई बदलती परिस्थितियों तथा आर्थिक परिदृश्य के आधार पर केवल दर बढ़ाने या यथास्थिति बनाए रखने तक सीमित रह सकती है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि आगे मौद्रिक सख्ती का समय और उसकी सीमा महंगाई तथा आर्थिक वृद्धि की स्थिति पर निर्भर करेगी। खासकर, कीमतों पर बुनियादी दबाव और इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि आपूर्ति संबंधी झटके व्यापक अर्थव्यवस्था में किस हद तक स्थायी रूप लेते हैं।
यह फरवरी, 2023 के बाद पहला मौका है जब नीतिगत दर में वृद्धि की गई है। इससे पहले पिछले साल फरवरी से दिसंबर, 2025 तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इस साल फरवरी, अप्रैल, जून तथा अगस्त की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस फैसले के साथ भारत उन प्रमुख केंद्रीय बैंकों की कतार में शामिल हो गया है, जिन्होंने महंगाई बढ़ने के बीच ब्याज दरों में वृद्धि की है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ रही है। इससे लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित हो रही है और मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। अल नीनो से जुड़ी कमजोर बारिश ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने के बावजूद महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो लगातार तीसरे महीने आरबीआई के चार प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रही। इस दौरान मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति भी बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। केंद्रीय बैंक ने कहा कि महंगाई का जोखिम अब एक साल पहले की तुलना में अधिक बढ़ गया है। इसका कारण खाद्य और ईंधन की ऊंची कीमतों, मानसून की कमी, अल नीनो की स्थिति तथा अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में फिर से बढ़ी अस्थिरता है।














