सुप्रीम कोर्ट ने कहा मेट्रो-रेल सामान्य चलें
इंटरनेट बहाल करें : सीजीपी प्रदर्शन में 45 मेट्रो स्टेशन बंद और 7000 लोग कस्टडी में लिए थे
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली प्रोटेस्ट में पुलिस की बेहद सख्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को साफ निर्देश दिया है कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत नहीं होनी चाहिए। इसने मेट्रो और रेल सेवाओं पर प्रतिबंध हटाने, लोगों की आवाजाही में रुकावट नहीं डालने और इंटरनेट को बहाल करने के भी निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई में ये निर्देश जारी किए। साथ ही केंद्र सरकार से कहा कि सार्वजनिक सभाओं और लोगों की आवाजाही पर लगाई जाने वाली पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 19(2) में तय शर्तों के अनुरूप होनी चाहिए। अदालत ने सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजीपी) की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ बुलाए गए प्रदर्शनों के बीच दिल्ली मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलें और इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों।
संविधान का अनुच्छेद 19(2) सार्वजनिक व्यवस्था समेत कुछ निर्धारित आधारों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस बी. मोहना की पीठ ने शनिवार को लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कहा, ‘मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए। इन्हें तभी नियंत्रित किया जाए, जब संविधान के अनुच्छेद 19(2) में उल्लिखित सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा की आशंका को देखते हुए ऐसा करना जरूरी हो। पीठ ने अधिकारियों को बैरिकेडिंग की समीक्षा करने, लागू नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही सुचारू रखने और जहां भी सुप्रीम कोर्ट या अन्य अदालत तक पहुंच रोकने वाले बोर्ड लगाए गए हैं, उन्हें हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, ‘यातायात नियमों के अधीन शहर में लोगों की स्वतंत्र आवाजाही की अनुमति दी जाए। साथ ही निर्देश दिया कि ‘कानून-व्यवस्था और यातायात की अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड लगाने की जरूरत की तत्काल समीक्षा की जाए। पीठ ने यह भी कहा कि इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि अदालत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की प्रशासन की शक्तियों में हस्तक्षेप नहीं कर रही है। इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सीजीपी लीडर अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह करीब 10 बजे रिहा करने का आदेश दिया। तीनों 23 घंटे पुलिस कस्टडी में रहे। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट ने 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के विरोध में प्रदर्शन बुलाया था।













