लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली तक जारी रहेगा राजनीतिक प्रतिरोध : इंडिया गठबंधन
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन इंडिया ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग के मामले में अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की बहाली तक राजनीतिक और जन प्रतिरोध जारी रहेगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास 5 सुनहरी बाग रोड पर आयोजित चाय पार्टी के बाद विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला तथा यह आरोप भी लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेना हमारा मिशन है। इसमें जितना भी समय लगे, एक दिन, एक साल या दो साल, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। राहुल ने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने के लिए अंत तक संघर्ष करेगा। आठ दिन में यह विपक्षी नेताओं की छठी बैठक थी।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और उसके संघर्ष का एकमात्र उद्देश्य देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करना है। उन्होंने कहा, कोई समानांतर विरोध प्रदर्शन नहीं है, सिर्फ एक प्रदर्शन है। इस प्रदर्शन का एकमात्र मिशन भारत में लोकतंत्र को बहाल करना है। देश में लोकतंत्र को नष्ट कर दिया गया है, चुनाव प्रणाली को नष्ट कर दिया गया है। हम देश में वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांधी ने कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर का इस्तेमाल लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन के लिए नहीं होने देने का फैसला किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा, इतना आसान नहीं है कि संविधान को नष्ट करें और बचकर निकल जाएं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि एक दिन पहले विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान जो अभिव्यक्ति देखने को मिली, वह किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के लोगों की अभिव्यक्ति थी। उन्होंने कहा, हम एक गठबंधन के रूप में दिल्ली के लोगों और भारत के लोगों का आभार व्यक्त करते हैं कि वे खड़े हुए। हम देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए लड़ाई जारी रखने वाले हैं।
एसआईआर के खिलाफ विपक्ष की याचिका में 14 खामियां
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत 11 विपक्षी नेताओं की तरफ से दायर याचिका में करीब 14 खामियां बताई हैं। यह याचिका वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में बड़े पैमाने पर नाम हटाने और गड़बड़ियों के आरोपों से जुड़ी है। जानकारी के मुताबिक, रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आईडी कार्ड की साफ कॉपी मांगी। 9 याचिकाकर्ताओं ने याचिका दायर करने की लिखित सहमति नहीं दी। वीरजिस्ट्री ने यह भी कहा कि याचिका के साथ जमा किए दस्तावेज के कुछ पन्ने पढ़ने लायक नहीं हैं। कुछ गायब हैं। कोर्ट फीस में 220 रुपए कम जमा की गई है। 12 अक्टूबर को दायर याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।
मार्च के खिलाफ 4 एफआईआर दर्ज
एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर इंडिया के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने 4 एफआईआर दर्ज की हैं। ये कनॉड प्लेस, तिलक मार्ग, बाराखंभा और मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई हैं। इनमें राहुल और प्रियंका के नाम भी शामिल हैं।
गांधी ने कहा कि विपक्षी गठबंधन एकजुट है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के लिए उसका संघर्ष जारी रहेगा। उनके आवास पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम.ए. बेब्बी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा, समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक और आनंद भदौरिया, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ विपक्ष के संयुक्त विरोध-प्रदर्शनों और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सोमवार को हुए विपक्ष के प्रदर्शन में लोगों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली में संभवतः इतनी बड़ी संख्या में लोग पहले कभी सड़क पर नहीं उतरे होंगे। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह के इशारे पर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किया है।













