राहुल गांधी समेत 14 नेताओं को नोटिस, चुनाव आयोग और केंद्र से मांगा जवाब
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता और अदालत जानती है कि बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय तक किए गए मार्च से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने, शीर्ष अदालत तक मार्च करने के खिलाफ दायर याचिका पर गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा समेत 14 नेताओं व कांग्रेस पार्टी और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को नोटिस जारी किया है।
वहीं एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ इन नेताओं की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने पीठ से कहा कि 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय परिसर में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भाटिया ने पीठ से कहा, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि उच्चतम न्यायालय किसी राजनीतिक जुलूस के मामले से निपट रहा है। जब उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को डराने-धमकाने की इस तरह की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता। याचिका में अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और न्यायिक व्यवस्था में बाधा डालने वाले नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और अन्य अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर करने के लिए 12 अक्टूबर को, गांधी और विपक्ष के कई अन्य प्रमुख नेता अपने समर्थकों के साथ उच्चतम न्यायालय पहुंचे थे।













