नागपुर। दिवाली से पहले राज्य के सूखाग्रस्त किसानों को केवल 5,000 रुपये की सहायता राशि देने को किसानों के साथ किया जा रहा क्रूर मजाक है। यह आरोप लगाते हुए विदर्भ राज्य आंदोलन समिति (वीराआंस) और शेतकरी संगठन की ओर से गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ‘भीख मांगो’ आंदोलन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस प्रदर्शन से एकत्रित राशि प्रभारी निवासी उपजिल्हाधिकारी इंदिरा चौधरी को सौंप कर मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा की जाए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम से किसानों की विभिन्न मांगों का ज्ञापन भी सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष औसत से 40 प्रतिशत कम वर्षा होने के कारण राज्य के किसान सूखे के संकट का सामना कर रहे हैं। साथ ही दावा किया गया कि सूखे और बकाया ऋणों के कारण वर्धा जिले के साथ-साथ अमरावती विभाग के सभी जिलों में किसानों द्वारा आत्महत्याओं का सिलसिला जारी है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है और पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। यह आशंका भी व्यक्त की गई कि सूखे की स्थिति के कारण रबी की बुआई भी असंभव हो जाएगी।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सरकारी जल स्रोतों से पानी का उपयोग अगस्त 2027 तक प्रतिबंधित होने के कारण रबी फसलों की सिंचाई नहीं हो पाएगी। इस स्थिति को देखते हुए प्रदर्शनकारियों ने संकटग्रस्त किसानों के लिए तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की। मुख्य मांग यह थी कि सरकार सूखा प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपये की वित्तीय सब्सिडी बिना हेक्टेयर सीमा निर्धारित किए प्रदान करे और सभी कृषि ऋण माफ कर किसानों का सातबारा कोरा करे।
इसके अतिरिक्त यह मांग की गई कि राजस्व भूमि पर जबरनजोत किसानों के अतिक्रमण को नियमित किया जाए और उन्हें तत्काल सरकारी भूमि पट्टे आवंटित किए जाएं। साथ ही केंद्र सरकार से यह भी मांग की गई कि वह कानून में संशोधन करे और वन अधिकार अधिनियम के तहत अन्य पारंपरिक वनवासियों और गैर-आदिवासियों को वन पट्टे देते समय लागू तीन पीढ़ियों की शर्त को समाप्त करे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अन्य जंगली जानवरों के हमलों की तरह ही सांप के काटने से मरने वाले किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। ज्ञापन में सरकार से इन मांगों पर तत्काल निर्णय लेने और दिवाली के त्योहार के दौरान किसानों को राहत प्रदान करने की अपील की गई।
प्रदर्शनकारियों के जिलाधिकारी कार्यालय के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही पुलिस ने बैरिकेड लगाकर गेट बंद कर दिया। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मौखिक झड़प हुई। इसके बाद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने प्रवेश द्वार के सामने लगभग एक घंटे तक धरना दिया। इस दौरान कार्यालय आने-जाने वाले वाहनों का आवागमन बाधित हो गया और वाहनों के साथ-साथ नागरिकों की लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘किसानों का मजाक उड़ाने वाली सरकार की निंदा करो’, ‘कर्ज में डूबी सरकार की निंदा करो’ और ‘महाराष्ट्र सरकार का निषेध’ जैसे नारे लगाकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि किसानों के वित्तीय संकट की गंभीरता को देखते हुए सरकार तुरंत सहायता की घोषणा करे, ऋण माफी पर निर्णय ले और लंबित मांगों को पूरा करे।
आंदोलन में विराआंस के उपाध्यक्ष अरुण केदार, युवा आघाड़ी के प्रांताध्यक्ष मुकेश मासूमकर, पूर्व विदर्भ उपाध्यक्ष सुनील चोखारे, शेतकरी संगठन के नागपुर जिला अध्यक्ष श्रीकांत दौलतकर, युवा आघाड़ी अध्यक्ष संजय चौधरी, विराआंस के नागपुर जिला अध्यक्ष प्रशांत नखाते, शहर अध्यक्ष नरेश निमजे, शहर महिला अध्यक्ष ज्योति खांडेकर, नरखेड शेतकरी संगठन के अध्यक्ष वसंतराव वैद्य के साथ गुलाबराव धांडे, गिरीश तितरमारे, डॉ. झेलम कटोच, रवींद्र भामोडे, विजय मोंदकर, सचिन लोणकर, नीलकंठराव अंभोरे, शोभा येवले, संगीता अंबारे, देवराव घोडे, नितिन गोधाने, निखिल मोहनकर, रत्नाकर जगताप, विट्ठलराव मानेकर, भाऊराव नसारे, गंगाधर मुंदकर, तेजराम रेवतकर, प्रशांत जयकुमार, वसंतराव मुंडले, मेघा मातुरकर, अश्विनी मुंजे, चंद्रशेखर शेंडे, तारेश दुरुगकर, हरिभाऊ पानबुडे, राजीव म्हैसबड़े, पुंडलिक गुडधे, अमित नखाते, निवेश शेंडे और अमोल रडके सहित सैकड़ों किसान शामिल हुए।














