चुनाव आयोग का इनकार : कहा- यह सीक्रेट : आरटीआई में नाम-वर्जन और एआई इस्तेमाल पर पूछे थे सवाल
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान के अंतर्गत देश भर से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति में भारत निर्वाचन आयोग ने एक नया रुख अपनाया है, जिसके तहत आयोग ने आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत उस सॉफ्टवेयर, ऐप या एआई टूल का नाम और वर्जन बताने से साफ इनकार कर दिया है, जिसका उपयोग वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को पहचानने के लिए किया गया था। आयोग का तर्क है कि यह जानकारी ‘कमर्शियल कॉन्फिडेंस, ट्रेड सीक्रेट और आईपी’ से संबंधित है और इसे आरटीआई कानून की धारा 8(1)(d) के तहत छूट प्राप्त है। यह आरटीआई आवेदन तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब द्वारा दाखिल किया गया था, जिन्होंने आयोग से कई तीखे सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा कि वोटर डेटा में गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए कौन सा सॉफ्टवेयर या एआई प्लेटफॉर्म उपयोग में लाया गया है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या यह सिस्टम नाम हटाने के लिए स्वतः ही फ्लैग करता है और वैध मतदाता का नाम गलती से न कटे, इसके लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इसके साथ ही, फ्लैग की गई गड़बड़ियों की समीक्षा कौन से अधिकारी करते हैं। 16 अक्टूबर को दिए गए अपने आधिकारिक जवाब में चुनाव आयोग ने कई स्पष्टीकरण दिए। आयोग ने धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर का नाम या वर्जन उजागर करने से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुँच सकता है। जब आयोग से पूछा गया कि नाम काटने की समीक्षा कौन करता है, तो उसने धारा 8(1)(g) का संदर्भ दिया, जो किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली जानकारी को रोकने से संबंधित है। (पेज 6 पर)
जानकारी क्यों छिपा रहा चुनाव आयोग : कांग्रेस
कांग्रेस ने रविवार को चुनाव आयोग पर विवादित ईसीआईऑइंट सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि निर्वाचन आयोग बार-बार इस जानकारी को सार्वजनिक करने से इनकार कर रहा है, क्योंकि इससे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित तौर पर हुई बड़े पैमाने की और केंद्रित गड़बड़ियों की सच्चाई सामने आ सकती है। विपक्षी दल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की अपनी मांग भी दोहराई। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने ईसीआईऑइंट सॉफ्टवेयर के नाम और उसके संस्करण से जुड़ी जानकारी देने से इनकार कर दिया है। जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में कहा, भारतीय निर्वाचन आयोग विवादित ईसीआईऑइंट सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी लगातार छिपा रहा है। यह सॉफ्टवेयर एसआईआर की विवादित प्रक्रिया के केंद्र में है और इसका इस्तेमाल मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर को केंद्रित तरीके से अंजाम देने के लिए किया गया है।













