सतेज पाटिल का आरोप, 9 नवंबर को निकाला जाएगा मोर्चा
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। गोकुल दूध संघ की सत्ता हासिल करने के लिए राज्य सरकार ने जानबूझकर कानून में बदलाव करने का फैसला लिया है। जनता द्वारा दिए गए जनादेश को सरकार स्वीकार नहीं कर पा रही है, इसलिए बहुमत अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। केवल गोकुल की सत्ता हासिल करने के लिए सरकार द्वारा कानून में बदलाव करना गलत है। इन शब्दों में कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने सत्ताधारी दलों की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार के इस फैसले के विरोध में आगामी 9 नवंबर को संघर्ष मोर्चा निकाला जाएगा। वे गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। गोकुल दूध संघ करीब साढ़े पांच लाख किसानों के परिवारों से जुड़ा हुआ है। यहाँ प्रतिदिन लगभग 20 लाख लीटर दूध का संकलन होता है। इतनी महत्वपूर्ण सहकारी संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए सरकार ने कानून में बदलाव किया है।
बताया जा रहा है कि यह कानून केवल गोकुल जैसी फेडरल संस्थाओं पर लागू होगा। फिर यह बदलाव केवल गोकुल के लिए ही क्यों किया जा रहा है? यह सवाल पाटिल ने उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव हुआ, मतदान हुआ और नतीजे भी घोषित हो गए। लेकिन अपनी तरफ नतीजे नहीं आने पर कानून ही बदल देना लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है। यदि चुनाव से पहले कानून में बदलाव किया जाता तो बात समझ में आती, लेकिन नतीजों के बाद ऐसा फैसला लेना जनता के जनादेश को नकारने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि कल का दिन इतिहास में काले दिन के रूप में याद किया जाएगा। इस फैसले के लिए हसन मुश्रीफ और चंद्रकांत पाटिल ने पहल की, ऐसा आरोप लगाते हुए सतेज पाटिल ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में इस कानून के परिणामों पर किसी ने भी चर्चा नहीं की। हसन मुश्रीफ के बारे में नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि दोस्त ने दोस्ती में विश्वासघात किया है। पाटिल ने विश्वास जताया कि गोकुल में बहुमत उनके पास है और उन्हें अदालत से न्याय मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के लिए सात दिनों का नोटिस देना होगा। गोकुल के संचालकों के बारे में बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग गोवा, सूरत और अब उदयपुर में हैं। हालांकि, इससे बहुमत नहीं बदलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके पास 13 का बहुमत रहेगा।
सतेज पाटिल के समर्थन में आए उद्धव ठाकरे
इसी बीच, उद्धव ठाकरे ने सीधे सतेज पाटिल को फोन कर उनसे बातचीत की। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि गोकुल की इस लड़ाई में शिवसेना का उद्धव ठाकरे गुट उनके साथ खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनकी पार्टी सतेज पाटिल का समर्थन करेगी। उद्धव ठाकरे के इस समर्थन को गोकुल की सत्ता के संघर्ष में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
महायुति में भी उठने लगे विरोध के स्वर
अब गोकुल को लेकर महायुति में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिंदे गुट की शिवसेना ने इस मुद्दे पर अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है। शिंदे गुट का कहना है कि गोकुल में जो सदस्य लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए हैं, उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए। गोकुल में चार संचालकों की नियुक्ति किए जाने के बाद दोनों दलों के बीच विवाद और बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब इस मामले में क्या समाधान निकलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।















