ईरान के शहरी विकास उप मंत्री होशंग बाजवंद ने कहा है कि देश ने ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ यानी आईएनएसटीसी के लिए उत्तरी प्रांत गिलान में ‘रश्त-अस्तारा’ रेलवे लाइन के लिए निर्धारित पूरी जमीन रूसी पक्ष को सौंप दी है। ये एक बहुत बड़ी जियो-पॉलिटिकल घटना है और इससे भारत को बंपर फायदा होगा। होशंग बाजवंद ‘कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी’ के सीईओ भी हैं। बड़ा फायदा- स्वेज नहर के मुकाबले आधा समय लगेगा। यानी करीब 20-25 दिनों में दूरी होगी तय।
ग्लोबल ट्रेड को फायदा- भारत, ईरान, अजरबैजान और रूस को इससे काफी फायदा होगा। ‘रश्त-अस्तारा’ रेलवे लाइन की जमीन निर्धारित होने के बाद आईएनएसटीसी के काम में तेजी आ जाएगी। ईरानी मंत्री बाजवंद ने बताया है कि 162 किलोमीटर लंबी ‘रश्त-अस्तारा’ रेलवे लाइन के मार्ग का बचा हुआ 37 किलोमीटर का हिस्सा रूसी पक्ष को सौंप दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि ईरानी सरकार ने पहले ही 55 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। इससे पहले फरवरी में इस मार्ग का 125 किलोमीटर का हिस्सा रूसी पक्ष को सौंपा जा चुका था। रश्त-अस्तारा कॉरिडोर से भारत को बंपर फायदा होगा।
भारत आईएनएसटीसी कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। सेन्ट्रल एशिया, उज्बेकिस्तान और ईरान पर नजर रखने वाले जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉ. सैयद मोहम्मद मुर्तजा ने एक पोस्ट में लिखा है कि ‘इस कॉरिडोर पर मास्को में व्लादिमीर पुतिन और मोहसेन रेजाई के बीच हुई बैठक में चर्चा की गई थी। ईरान के इन दो शहरों के बीच प्रस्तावित रेल कॉरिडोर लगभग 162 किलोमीटर लंबा है। यह ईरान के रेलवे नेटवर्क को अजरबैजान के रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगा। इससे आईएनएसटीसी के पश्चिमी रूट में मौजूद एक अहम रेलवे लिंक पूरा हो जाएगा।’

















