अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए धुआंधार चुनावी सभाएं कीं और समर्थकों से यहाँ तक अपील की कि वे उन्हें ही उम्मीदवार मानकर मतदान करें, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। अब ट्रंप इस हार से अपना पल्ला झाड़ने और यह साबित करने में जुटे हैं कि इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं। रिपब्लिकन पार्टी की इस करारी शिकस्त के बाद अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा कायम हो गया है। डेमोक्रेट्स ने सीनेट में भी उन कई सीट पर जीत दर्ज की है, जिन्हें कभी रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता था। उन्होंने साउथ कैरोलिना और कंसास में भी जीत हासिल की, जहाँ 1932 के बाद से कोई डेमोक्रेटिक सीनेटर नहीं चुना गया था।
वहीं, टेक्सास में तीन दशक से अधिक समय से राज्यस्तरीय चुनावों में लगातार हार का सामना कर रहे डेमोक्रेट्स ने इस बार वहाँ भी जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों की पूरी तस्वीर सामने आने से पहले ही ट्रंप ने अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए थे। चुनावी रात वह सामान्य दिनों की तुलना में कुछ अधिक विनम्र दिखाई दिए। उन्होंने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने और चुनाव परिणामों को स्वीकार करने की बात कही। हालांकि, इसके बावजूद वह हार की जिम्मेदारी लेने से बचते नजर आए। ट्रंप ने कहा कि मैं इसे अपनी हार नहीं मानना चाहता। मैं खुद चुनाव मैदान में नहीं था। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं को चुनाव लड़ रहे ‘उम्मीदवार पसंद नहीं आए।’ हालांकि, ‘द एपी वोटर पोल’ के आंकड़े संकेत देते हैं कि ट्रंप खुद रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए बड़ी कमजोरी साबित हुए।
देशभर में केवल 10 में से चार मतदाताओं (40 प्रतिशत) ने राष्ट्रपति के रूप में उनके कामकाज को सराहा। ओहायो, आयोवा, मेन और नॉर्थ कैरोलिना जैसे राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। इन राज्यों में ज्यादातर मतदाताओं का मानना था कि रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार इस अलोकप्रिय राष्ट्रपति का ‘जरूरत से ज्यादा समर्थन’ कर रहे हैं। इसके बावजूद राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया मंच पर दावा किया कि अगर वह खुद चुनाव लड़ रहे होते, तो ‘हम भारी बहुमत से जीतते!’ छोटे-बड़े मामलों में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का ट्रंप का पुराना इतिहास रहा है।
खासकर चुनावी हार के मामले में उनका रवैया ऐसा ही रहा है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2018 के चुनाव में जब रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा में हार गई थी, तब भी उन्होंने अपनी ही पार्टी के पराजित उम्मीदवारों पर हार का ठीकरा फोड़ा था। यूटा की तत्कालीन सांसद मिया लव ने ट्रंप से दूरी बनाने की कोशिश की थी। इस पर राष्ट्रपति ने कहा था कि मिया लव ने मुझे कोई तवज्जो नहीं दी और फिर वह हार गईं। बहुत बुरा हुआ। उन्होंने चुनाव हारने वाले उन उम्मीदवारों का भी मजाक उड़ाया था, जिन्होंने खुलकर उनका समर्थन नहीं किया था। इनमें फ्लोरिडा के कार्लोस कुर्बेलो, कोलोराडो के माइक कॉफमैन, वर्जीनिया की बारबरा कॉमस्टॉक और इलिनॉय के पीटर रोस्कम शामिल थे। तब उन्होंने तंज कसते हुए वही बात कही थी, जिसे वह आठ साल बाद भी दोहराने वाले थे- ‘इन चुनाव में मैं उम्मीदवार ही नहीं था।’ अब एक बार फिर ट्रंप चुनावी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उन्होंने खुद मतदाताओं से कहा था कि वे ‘यह मानकर मतदान करें कि उम्मीदवार मैं ही हूँ।’

















