महाराष्ट्र समेत 7 राज्यों के वोटर फिर जुड़वा सकेंगे नाम
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को पंजीकरण का एक और मौका देने का फैसला चुनाव आयोग ने लिया है। यह अवसर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि (एसएसडीडी) के रूप में दर्ज किए गए मतदाताओं को मिलेगा। इन मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म जारी किए गए थे, लेकिन वे नहीं लौटे। इसके परिणामस्वरूप एसआईआर के दौरान उनके नामों को मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सका। आयोग के ये निर्देश दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नगालैंड राज्यों पर लागू होंगे। इस दौरान दोहरी पंजीकरण प्रविष्टियों को रोकने के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। एसआईआर के दौरान 2025-26 में बिहार और दिल्ली समेत 30 राज्यों की मसौदा मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए थे। अब नए फैसलों के जरिए इन नामों को फिर से शामिल किया जा रहा है।
यदि आपका नाम मसौदा सूची से गायब है और आपको एसएसडीडी के रूप में चिह्नित किया गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) दोबारा आपके घर आ सकते हैं। इसके अलावा, दावा-आपत्ति प्रक्रिया के दौरान एक फॉर्म भरकर भी आप अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवा सकते हैं। इसके लिए आपको आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पते का प्रमाण देना होगा। एसआईआर के दौरान लाखों नाम हटाए जाने के बाद बिहार में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला था।
अब सात राज्यों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायतों के अनुसार, जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि बाहर गए लोगों को अनुपस्थित दर्ज कर दिया गया। इन्हीं शिकायतों के बाद आयोग ने यह निर्णय लिया है। इससे पहले 3 नवंबर को आयोग ने एक और फैसला लिया था। इसमें कहा गया था कि यदि किसी मतदाता का नाम एसआईआर की मसौदा मतदाता सूची में नहीं है, तो वह फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकता है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि कोई व्यक्ति पिछले 10 वर्षों से मतदाता होने के बावजूद फॉर्म-6 भर सकता है। इसे झूठा शपथपत्र नहीं माना जाएगा और न ही उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनके लिए चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अक्टूबर में किए गए इस बदलाव के बाद, किसी मतदाता का नाम हटाए जाने पर एसआईआर सूची में 2003 की मतदाता सूची से संबंधित जानकारी देना अब आवश्यक नहीं होगा। आवेदकों को अब यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि उनका नाम, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था या नहीं। फॉर्म-6 से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया गया है।















