मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति
लोकवाहिनी न्यूज
नागपुर। ‘दीपोत्सव 2026’ दिवाली अंक का गुरुवार को नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री के रामगिरी निवास पर आयोजित कार्यक्रम में मंच पर लोकवाहिनी के मुख्य संपादक डॉ. प्रवीण महाजन, नागपुर संस्करण के संपादक चारुदत्त कडू के साथ भारतीय जनता पार्टी के नागपुर शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी, राज्य के मंत्री आशिष जयसवाल, विधायक परिणय फुके, विधायक संजय भेंडे, विधायक कृष्णा खोपड़े और नागपुर पत्रकार क्लब के अध्यक्ष प्रदीपकुमार मैत्र उपस्थित थे। दैनिक लोकवाहिनी के ‘दीपोत्सव’ बहुरंगी दिवाली अंक का यह दूसरा वर्ष है।
महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित लेखकों के योगदान से यह अंक तैयार किया गया है। अंक के लिए लोकवाहिनी के नागपुर संस्करण के सहायक संपादक विजय गावंडे, मुंबई संस्करण के संपादक प्रसाद मोकाशी और लोकवाहिनी हिंदी संस्करण के संपादक राजेश नामदेव का सहयोग मिला है। अंक की रूप-सज्जा और सजावट वैशाली मोरे तथा कालिदास खब ने की है, जबकि विज्ञापन सहयोग विवेक पारकर और रसिका जगदाले ने दिया है। नारायण ऑफसेट वर्क्स, नागपुर में प्रकाशित इस अंक का मूल्य 300 रुपये है। दिवाली अंक हमारी सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। जिस तरह फराल की थाली में चकली, लड्डू, करंजी, चिवड़ा और शंकरपारे का विशेष स्थान होता है, उसी तरह दिवाली के आनंद में दिवाली अंक का भी अपना अलग स्थान है।
दैनिक लोकवाहिनी का ‘दीपोत्सव 2026’ अंक भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला, विचारों को नई दिशा देने वाला और मनोरंजन की सौगात देने वाला है। इस वर्ष के अंक की सामग्री वैचारिक और मनोरंजनात्मक व्यंजनों की एक सुंदर दावत है। कुछ कहानियां पढ़ते हुए हंसी के फव्वारे छूटेंगे, तो कुछ लेख मन को आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस वर्ष देश और दुनिया में आंदोलनों के कई रंग देखने को मिले। शिक्षा के लिए, भ्रष्टाचार के विरोध में, इस्तीफे की मांग को लेकर तो कभी व्यवस्था में बदलाव के लिए विभिन्न आयु वर्ग के लोग सड़कों पर उतरे। इन आंदोलनों के पीछे आखिर किस तरह की बेचैनी है? नई पीढ़ी भ्रमित है या अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हुई है?– उसके मन में आखिर कौन-से विचार चल रहे हैं? इन सवालों की पड़ताल करने वाले लेख इस अंक में शामिल किए गए हैं।
नीट परीक्षा के पेपर लीक से उठे विवाद, फर्जी विश्वविद्यालयों के बढ़ते प्रसार और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर खड़े हुए सवालों ने अभिभावकों, विद्यार्थियों और समाज की चिंता बढ़ा दी है। महाशक्ति बनने का सपना देखने वाले देश की युवा पीढ़ी को क्या गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है? क्या शिक्षा ज्ञान प्राप्ति का माध्यम रह गई है या फिर वह केवल अंक, प्रमाणपत्र और बाजार की प्रतिस्पर्धा का साधन बनती जा रही है? इन सवालों पर चर्चा करने वाले ‘दीपोत्सव 2026’ के लेख पाठकों को सोचने पर मजबूर करेंगे। आज पर्यटन केवल शौक नहीं रह गया है, बल्कि कई लोगों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। छुट्टी मिलते ही प्रकृति के सान्निध्य में जाने की इच्छा होती है। लेकिन प्रकृति का आनंद लेते समय हम उसका संरक्षण करते हैं या उसकी सुंदरता को नुकसान पहुंचाते हैं, इस पर कितने लोग विचार करते हैं? अत्यधिक पर्यटन के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और प्रकृति के हो रहे विनाश की वास्तविकता को सामने लाने वाला प्रकृति का आत्ममकथ्य इस अंक का महत्वपूर्ण लेखन है।














