अहेरी महिला एवं बाल अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी
उद्घाटन के कई महीने बाद भी पद खाली | भर्ती की मांग को लेकर प्रदर्शन
लोकवाहिनी, संवाददाता |
गड़चिरोली। मुख्यमंत्री एवं गड़चिरोली के पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बड़े स्तर पर उद्घाटन किए गए अहेरी महिला एवं बाल अस्पताल में आज भी डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों के कई पद रिक्त हैं। अस्पताल के उद्घाटन को छह से सात महीने बीत जाने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने से आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के विरोध में सोमवार को नगरसेवक अमोल मुक्कावार के नेतृत्व में किए गए ‘ताला ठोंको’ आंदोलन के दौरान पुलिस ने उन्हें सहित चार आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार के उद्घाटन के समय दुर्गम आदिवासी क्षेत्र को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। लेकिन पर्याप्त चिकित्सीय स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से अस्पताल में अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। इसे लेकर स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकार ने केवल भवन का उद्घाटन कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है। इससे पहले 22 जून को आंदोलनकारियों ने उपविभागीय अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर सभी रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की मांग की थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि 28 जून तक भर्ती नहीं होने पर 29 जून को ‘ताला ठोंको’ आंदोलन और 30 जून से आमरण अनशन किया जाएगा।
सोमवार सुबह आंदोलनकारी अस्पताल पहुंचे और रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के. डी. मडावी ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की तथा वरिष्ठ अधिकारियों से दूरभाष पर बातचीत भी कराई। हालांकि, भर्ती को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर आंदोलनकारियों ने अस्पताल में ताला लगाने का निर्णय बरकरार रखा। जैसे ही उन्होंने अस्पताल में प्रवेश करने का प्रयास किया, पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए अमोल मुक्कावार समेत चार लोगों को एहतियातन हिरासत में ले लिया। इस दौरान अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
आज से आमरण अनशन की चेतावनी
पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन वापस नहीं लिया गया है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द ही रिक्त पदों पर भर्ती का निर्णय नहीं लेता, तो 30 जून से राजे विश्वेश्वरराव महाराज चौक पर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारी घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है।











