पुणे की विशेष अदालत ने 59 दिनों में बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुनाया फैसला
लोकवाहिनी, संवाददाता
पुणे। पुणे की एक विशेष अदालत ने नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में सोमवार को दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। इस घटना के बाद महाराष्ट्र में भारी जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। अतिरिक्त न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) एस. आर. साळुंखे ने इस मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम करार देते हुए भीमराव कांबले को सजा सुनाई, जो उस समय कठघरे में मौजूद था। जैसे ही न्यायाधीश ने मौत की सजा सुनाई, बच्ची का परिवार अदालत कक्ष में रो पड़ा। अपने फैसले के मुख्य हिस्से को पढ़ते हुए न्यायाधीश साळुंखे ने कहा कि अभियोजन के पक्ष में काफी मजबूत साक्ष्य मिले हैं। अदालत ने टिप्पणी की, यह अपराध एक ऐसे आरोपी द्वारा हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने से संबंधित है, जिसका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और गंभीर हमलों का एक लंबा इतिहास रहा है। अदालत ने एक मई को हुई इस आपराधिक घटना के साठ दिन के भीतर 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया था।
यह घटना एक मई को अपराह्न तीन बजे से चार बजे के बीच हुई थी। आरोप है कि कांबले पुणे जिले के नसरापुर गांव में बच्ची को खाने की चीजें दिलाने और मवेशी का बच्चा (बछड़ा) दिखाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची का यौन शोषण किया और फिर उसका मुंह दबाकर व छाती पर गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी थी। न्यायाधीश साळुंखे ने कहा, यह अपराध बेहद जघन्य तरीके से किया गया और पीड़िता को यातनाएं दी गईं तथा अमानवीय व्यवहार किया गया। पीड़िता एक मासूम और असहाय बच्ची थी। उसकी हत्या केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए की गई, जो आरोपी की विकृत मानसिकता और नैतिक पतन को दर्शाती है। यह बिना किसी उकसावे के की गई सुनियोजित और निर्मम हत्या थी। अपराध जिस क्रूरता से अंजाम दिया गया, उसने न केवल न्यायपालिका की अंतरात्मा, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर दिया है।
मैं फास्ट ट्रैक अदालत का विशेष आभार मानता हूं : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया गया। घटना के 55 वे दिन अदालत ने उसे दोषी ठहराया। इसके बाद 29 जून को आरोपी को अदालत ने तिहरी फांसी की सजा सुनाई है। केवल 29 दिनों में 55 गवाहों की जांच करके आरोपी को यह सजा हुई है। मैं फास्ट ट्रैक अदालत का विशेष आभार मानता हूं। क्योंकि चार्जशीट दाखिल होने तक की समयसीमा पुलिस के हाथ में होती है। उसके बाद वह अदालत के हाथ में होती है। न्यायमूर्ती एस. आर. साळुंखे ने अपनी छुट्टियां भी रद्द कर दी और लगातार सुनवाई की। इस तरह के नराधमों पर कार्रवाई करनी हो और उनमें डर पैदा करना हो तो समय पर न्याय मिलना जरूरी है। अदालत ने अब हमारे सामने एक नया उदाहरण पेश किया है। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीपसिंग गिल और सभी पुलिस अधिकारियों का अभिनंदन करता हूं क्योंकि उन्होंने सही तरीके से सबूत जुटाए। फांसी देने के लिए कोई भी संदेह बाकी नहीं रहना चाहिए, ऐसी व्यवस्था होती है। पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों के कारण हम यह फांसी की सजा दे सके। ऐसी घटनाएं न हों, यही हमारी इच्छा है। लेकिन दुर्भाग्य से समाज में जो प्रवृत्तियां हैं, वे सिर उठाती हैं। ऐसे नराधमों को 59 दिनों में फांसी तक पहुंचाया जा सकता है, यह इस मामले में हमें देखने को मिला। छोटी सी बच्ची थी, लेकिन उसके माता-पिता का दुख कम नहीं कर सकते, पर उन्हें संतोष होगा कि आरोपी को अदालत ने तिहरी फांसी की सजा सुनाई है, ऐसा देवेंद्र फडणवीस ने कहा है।
■ हैवान को बीच चौराहे पर फांसी दी जाए : सुप्रिया सुले
कोर्ट ने सोमवार को भीमराव कांबले को मरने तक फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद राष्ट्रवादी की सांसद सुप्रिया सुले ने पहली प्रतिक्रिया दी है। हैवान भीमराव कांबले को बीच चौराहे पर फांसी दी जाए, ऐसी मांग सुप्रिया सुले ने की है। नसरापुर मामले का 59 दिनों बाद फैसला आया। इस मामले में हैवान भीमराव कांबले को मरने तक फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट के इस फैसले का हर स्तर से स्वागत किया जा रहा है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, ‘जो फैसला आया है, मैं इस मामले में वहां के ग्रामीण पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का धन्यवाद करती हूं। हैवान ने क्रूरता से मासूम बच्ची की हत्या की थी। जिस दिन हैवान को फांसी होगी, उस दिन बच्ची को न्याय मिलेगा। मेरा कहना है कि उसे बीच चौराहे पर फांसी दी जानी चाहिए। महाराष्ट्र पुलिस दल, पुणे ग्रामीण पुलिस का सच में धन्यवाद करना चाहिए। कोर्ट का भी धन्यवाद करना चाहिए। जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन हमने तय किया था कि इसमें राजनीति नहीं लानी है। हम इस मामले में मुख्यमंत्री फडणवीस से भी मिलकर आए थे। उन्होंने हमें आश्वासन दिया था। इसलिए पुलिस दल, कोर्ट की राजनीति को अलग रखते हुए मैं धन्यवाद करती हूं। सभी ने मिलकर न्याय देने का प्रयास किया। इसका पहला चरण पूरा हुआ है। मेरी मुख्यमंत्री और कोर्ट से विनम्र विनती है कि इस हैवान को बीच चौराहे पर फांसी की सजा दी जाए। वास्तव में उसे कुचल देना चाहिए, लेकिन हमारा देश संविधान के अनुसार चलता है इसलिए उसे जल्द से जल्द बीच चौराहे पर फांसी दी जानी चाहिए।’ अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई भी राहत की गुंजाइश नहीं है।











