नागपुर। स्नातक विधानसभा चुनाव में भाजपा में बगावत की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक अनिल सोले सोमवार दोपहर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भाजपा की केंद्रीय चयन समिति ने सभी चर्चाओं और अटकलों पर विराम लगाते हुए नागपुर से सुधाकर कोहले की उम्मीदवार की घोषणा की है। सुधाकर कोहले और अनिल सोले भाजपा के इच्छुक उम्मीदवार थे। अनिल सोले का प्रचार अभियान सोशल मीडिया पर भी शुरू हो गया था। पिछले स्नातक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सही समय पर अनिल सोले को उम्मीदवार से हटाकर संदीप जोशी को मौका दिया था। अनिल सोले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। अनिल सोले नागपुर के महापौर भी रह चुके हैं।
भाजपा केंद्रीय समिति ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व विधायक सुधाकर कोहले की उम्मीदवारी की घोषणा करते ही इच्छुक उम्मीदवारों में नाराजी का माहौल है। इसलिए अब मुख्यमंत्री के साथ-साथ नगर भाजपा के सामने भी उनकी नाराजगी दूर करने की चुनौती है। उम्मीदवारी की घोषणा होते ही कोहले नागपुर में मौजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने पहुंचे। लेकिन अब भाजपा के सामने पूर्व विधायक प्रो. सोले को मनाने की बड़ी चुनौती होगी, जो की प्रो. सोले बगावत करेंगे या एक अनुशासित पार्टी कार्यकर्ता के रूप में कोहले के लिए प्रचार करेंगे। सुधाकर कोहले की उम्मीदवारी की घोषणा दोपहर में हुई। ये तुरंत मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास रामगिरी पहुंचे। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को फूलों का गुलदस्ता भेंट कर धन्यवाद दिया। इस अवसर पर विधायक परिणय फुके, विधायक डॉ. राजीव पोद्दार, विधायक समीर मेघे, महापौर नंदा ठाकरे, पूर्व विधायक सागर मेघे, पूर्व विधायक विकास कुंभारे, नगर निगम में सत्तारूढ़ दल के नेता नरेंद्र बाल्य बोरकर और अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सोले के प्रयास अपर्याप्त
अनिल सोले अचानक एक माह पहले सक्रिय हो गए थे। सोले ने पार्टी से पिछली बार हारी हुई सीट को वापस जीतने का पुरजोर प्रयास किया था। पार्टी के कुछ मौजूदा और पूर्व विधायकों ने भी सोले की उम्मीदवारी के लिए एकजुट होकर पार्टी पर दबाव बनाया। इसी पृष्ठभूमि में सोले का 67वां जन्मदिन भी बड़े उत्साह से मनाया गया। माना जा रहा था कि इसके जरिए उनकी उम्मीदवारी के लिए माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा थी कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी सोले का समर्थन कर रहे थे। हालांकि, अंत में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कोहले का नाम आगे बढ़ाया और सोले के प्रयासों को विफल कर दिया। उम्मीदवारी के लिए उत्सुक हैं और सोशल मीडिया पर प्रचार भी शुरू कर चुके हैं। प्रो. सोले के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर हमने फैसला कर लिया है जैसे पोस्ट डालकर बगावत के संकेत दिए थे। इसलिए, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं।
कोहले का संयम, वरिष्ठों का समर्थन
पिछले कुछ वर्षों में सुधाकर कोहले को भाजपा में लगातार विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। 2019 में, दक्षिण नागपुर निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा विधायक होने के बावजूद, उनका टिकट काट दिया गया और मोहन मते को नामांकन दिया गया। इसके बाद, कोहले को भाजपा के नागपुर जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्य करते हुए, उन्हें 2024 में पश्चिम नागपुर से उम्मीदवारी मिली। इस चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी। छह जिलों में उनके संगठनात्मक कौशल और संपर्कों को देखते हुए, उन्हें मतदाता पंजीकरण प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सोले-सेनाड बगावत की राह पर, भाजपा को झटका
नागपुर डिवीजन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में उम्मीदवारी का मुद्दा सुलझते ही पार्टी के सामने एक नई दुविधा खड़ी हो गई है। कोहले की आधिकारिक उम्मीदवारी की घोषणा के बाद, पूर्व विधायक अनिल सोले ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करने की घोषणा कर दी है। इसी बीच, एड रमन सेनाड भी सोमवार को लोक जागृति मोर्चा के बैनर तले अपना नामांकन दाखिल करेंगे, इसलिए इस निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा को पहली बार बगावत का सामना करना पड़ेगा। उम्मीदवारी की घोषणा होते ही पार्टी के भीतर असंतोष उभर आया है।
चूंकि सोले ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में आवेदन दाखिल करने का रुख अपनाया है, इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ पार्टी के अपने उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे? सोले से पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस पद के लिए दावेदार हैं और सोमवार को अपना आवेदन दाखिल करेंगे। दूसरी ओर, एड रमन सेनाड ने भी कहा है कि वे लोक जागृति मोर्चा के माध्यम से चुनाव लड़ेंगे। सेनाड ने इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से उन्हें उम्मीदवार बनाने का अनुरोध किया था। सेनाड भाजपा और संघ परिवार के विभिन्न संगठनों में सक्रिय हैं।
बागियों से करेंगे चर्चा : सीएम
मसकर्या गणेशानी के दर्शन करने के पश्चात सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि बागियों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया जाएगा। जिसे टिकट मिली उन्होंने चुनाव लड़ना चाहिए और जिसे टिकट नहीं मिली उन्होंने पार्टी के नियमों का पालन करना चाहिए। सभी को टिकट मिले ऐसा संभव नहीं। नागपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में मसकर्या गणेशोत्सव का विशेष महत्व है। नागपुर की अनेक विशेषताओं में से गणेशोत्सव एक प्रमुख विशेषता है। इस ऐतिहासिक और अनूठी परंपरा को भोसले परिवार ने सैकड़ों वर्षों से अलंत सम्मान के साथ संरक्षित रखा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह गणेशोत्सव केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि नागपुर शहर की एक अनूठी और गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान बन गया है।













