समस्या : वैकल्पिक स्रोत निर्माण करने की अधिकारियों, पदाधिकारियों की इच्छा ही नहीं
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। एक ओर नागपुरवासियों को पानी की चिंता बढ़ रही है, तो दूसरी ओर शहर को आपूर्ति होने वाले पानी के उपयोग पर नियंत्रण और वैकल्पिक जलस्रोतों निर्माण करने के मामले में महानगरपालिका की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पीने के पानी का उपयोग बॉटलिंग प्लांट, वॉटर कैन व्यवसाय, कारखानों, कार वॉशिंग सहित अन्य व्यावसायिक कारणों के लिए हो रहा होने की बात सामने आ रही है। इसलिए नागरिकों के कर से खड़ी की गई जलव्यवस्था में पानी किसके लिए और कितना उपयोग किया जाता है, इसका पारदर्शी ऑडिट करने की जरूरत पैदा हो गई है।
महानगरपालिका पानी की आपूर्ति के लिए नागरिकों से कर वसूलती है। पानी और बिजली के खर्चे के लिए सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाता है। इसलिए उपलब्ध निधि का उपयोग केवल मौजूदा व्यवस्था चलाने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की जलसुरक्षा के लिए करना अपेक्षित है। लेकिन शहर में होने वाली बारिश के पानी का संरक्षण करके भूजल स्तर बढ़ाना, हर बड़ी इमारत में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रभावी रूप से लागू करना, सीवेज पर प्रक्रिया करके उसका पुनः उपयोग करना और गैर-पेय उपयोग के लिए स्वतंत्र जलस्रोत खड़े करना, इन विकल्पों पर कितनी गंभीरता से काम हुआ, यह सवाल अनुत्तरित है।
पानी पीने के लिए या व्यवसाय के लिए?
नागपुर को आपूर्ति होने वाले पानी का बड़ा हिस्सा पीने के लिए आरक्षित होने के बावजूद यदि उसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा हो तो उस पर कड़ा नियंत्रण आवश्यक है। कार वॉशिंग जैसे कामों के लिए पीने के पानी का उपयोग कम करके प्रोसेस किया हुआ पुनः उपयोग का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। उद्योगों के लिए भी स्वतंत्र पुनः उपयोग किया हुआ पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। लेकिन इसके लिए बुनियादी ढांचा खड़ा करना, स्वतंत्र जलवाहिनियां तैयार करना और प्रभावी मीटरिंग करना आवश्यक है। वहीं महानगरपालिका की वैकल्पिक जलव्यवस्था की खोजना की असली परीक्षा है। खेती का पानी शहर की ओर मोड़ दिया गया है, फिर भी शहरों की प्यास आज भी कायम है।
कृषि सिंचाई का उद्देश्य पीछे छूटा
राज्य के कई जलप्रकल्पों का निर्माण खेती को सिंचाई को प्राथमिकता देकर किया गया था। समय के साथ पीने के पानी की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इन परियोजनाओं का पानी शहरी क्षेत्रों की ओर मोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप खेती और शहर, दोनों की पानी की जरूरतों में तनाव पैदा हो रहा है। एक ओर खेती के लिए पानी की जरूरत, दूसरी ओर शहर की बढ़ती प्यास और तीसरी ओर उपलब्ध पानी का रिसाव, इन तीनों समस्याओं के केंद्र में जलप्रबंधन का सवाल है। इसलिए नागपुर महानगरपालिका को अब केवल जलसंसाधन विभाग से आरक्षण प्राप्त करने पर निर्भर न रहते हुए शहर के लिए स्वतंत्र वैकल्पिक जलसुरक्षा रूपरेखा तैयार करना जरूरी है।
अब महानगरपालिका से सीधे सवाल है, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का पूरे शहर में प्रभावी क्रियान्वयन क्यों नहीं हो रहा है? 35 प्रतिशत पानी का रिसाव या चोरी रोकने के ठोस उपाय किये जाते हैं? व्यावसायिक उपयोग के लिए पीने का पानी कितना दिया जाता है? कारखानों और कार वॉशिंग के लिए पुनः उपयोग किए गए पानी की स्वतंत्र व्यवस्था क्यों नहीं है? सीवेज पर प्रक्रिया करके उसका पुनः उपयोग कितनी मात्रा में होता है? भूजल पुनर्भरण के लिए शहरव्यापी योजना कहां है? भविष्य की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए बांधों के अलावा कौन से वैकल्पिक स्रोत हैं? बारिश कम होने पर अगस्त 2027 के बाद की व्यवस्था क्या होगी?
योजनाबद्ध कार्यवाही अनिवार्य
नागपुरवासियों को हर साल पानी का आरक्षण कितना मिला, इससे अधिक अगले दस-पंद्रह वर्ष के लिए पानी की गारंटी क्या है, इसका उत्तर चाहिए। बांध में पानी कम होते ही प्रशासन की भागदौड़ शुरू होना, यह स्थायी जलनियोजन का विकल्प नहीं हो सकता। नागपुर में बारिश की हर बूंद का संरक्षण, बहकर जाने वाले पानी का पुनर्भरण, बर्बाद होने वाले पानी पर रोक और इस्तेमाल किए पानी का पुनः उपयोग, इसके बिना शहर की भविष्य की प्यास का कोई समाधान नहीं है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि बांध में कितना पानी है। सवाल यह है, नागपुर महानगरपालिका ने कल के पानी के लिए अब तक क्या किया? विशेष रूप से, महानगरपालिका इसके लिए क्या कर रही है? महापौर, स्थायी समिति के अध्यक्ष, सत्तापक्ष के नगरसेवक, विपक्ष, आयुक्त के पास कौन से विकल्प हैं?। केवल समीक्षा बैठक लेना या पानी के मामले में भी नागपुर को आत्मनिर्भर बनाना, इसके लिए उनके पास क्या योजना है, इसका इंतजार सभी कर रहे हैं।












