लोकत्पाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उन याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। उन एसआईआर से जुड़े करीब 14 फैसले ले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लेने का आरोप है। अदालत ने उन्हें निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से तो इंकार किया, लेकिन न्यायालय ने कहा कि जो भी फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, उसे रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका पर अंतिम फैसला आने तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कोई भी फैसला लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा- फॉर्म 6 में किसी संशोधन को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। जबकि, 9 दिन पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ लगाए गए डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली है। फॉर्म 6 एक ऐसा आवेदन है जिसके जरिए कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने की मांग करता है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, हमने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। यह बात साफ होनी चाहिए। जब रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे, तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया है। पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो हाल में एक अखबार की खबर के बाद दायर की गई थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी, जिसमें आवेदक की वंशावली और पिछले एसआईआर से उसे लिंक करने के संबंध में ‘फॉर्म 6’ में किए गए बदलाव भी शामिल थे। (पेज 6 पर)
बलाव नहीं इसके साथ संलग्न घोषणापत्र को मंजूरी : आयोग
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने सोमवार को स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बिहार में मतदाता सूचियों के एसआईआर से जुड़ा आदेश जारी करते समय उसके साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया था, जिसे शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा था। आयोग ने यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय के यह कहने के तुरंत बाद आई है कि उसने फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। फॉर्म-6 के जरिए कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करता है। निर्वाचन आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बिहार में 24 जून 2025 को एसआईआर से संबंधित आदेश जारी करते समय फॉर्म-6 के साथ एक घोषणापत्र संलग्न किया गया था, जिसे शीर्ष अदालत ने 27 मई के आदेश में बरकरार रखा था। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणापत्र को माननीय उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। उसने कहा था कि एसआईआर की अवधि के अलावा सामान्य अवधि में नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू होने वाले फॉर्म का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
अवैध तरीके से बदलाव किया : राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किए और यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग ‘तक और एक सबूत’ है। गांधी ने 26 सितंबर की निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में डाला, अब यह संदेह से परे स्थापित हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। उन्होंने आरोप लगाया, यह भाजपा की मदद करने के लिए उनके पद का दुरुपयोग करने का एक और सबूत है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र पर ‘इस आपाताधिक हमले’ में शामिल ज्ञानेश कुमार और अन्य सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना। कांग्रेस नेता ने जिस प्रेस नोट का उल्लेख किया, उसमें निर्वाचन आयोग ने कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय द्वारा सही ठहराया गया है।














