जवाब में ईरान का क़तर, कुवैत और बहरीन के अमेरिकी ठिकानों पर हमला
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका-ईरान ने गुरुवार को फिर एक-दूसरे पर हमला किया। कुवैत में मौजूद अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, क़तर में एक सैटेलाइट एंटीना आधारित वॉर्निंग सिस्टम और बहरीन में अमेरिकी फ्यूल स्टोरेज फ़ैसिलिटीज़ को बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोन से निशाना बनाया गया। यह बयान ईरान के कई समाचार माध्यमों, जिनमें देश का सरकारी प्रसारक भी शामिल है, ने साझा किया है। ईरानी सेना ने कहा कि उसने ये हमले अमेरिकी एयर स्ट्राइक के जवाब में किए। साथ ही ईरान ने माना है कि अमेरिकी हमलों में उसके तीन लोग मारे गए हैं। इससे पहले, बहरीन, कुवैत और क़तर समेत कई खाड़ी देशों ने हमलों के बारे में अपने नागरिकों को अलर्ट किया था। वहीं अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि ईरान पर हमलों की लगातार दूसरी रात देश भर में लगभग 90 ठिकानों को निशाना बनाया। कुल मिलाकर अमेरिका ने दो रातों में ईरान के 170 ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
अमेरिकी सेंटकॉम ने हमलों के वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज़ स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नाविकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को और कमज़ोर करना था। निशाना बनाए गए ठिकानों में एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी उपकरण, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, नौसैनिक क्षमताएं और ईरान के तटवर्ती इलाकों में सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचा शामिल थे। सेंट्रल कमांड ने कहा, ये ताज़ा हमले ईरान में पिछली रात किए गए सफल आक्रामक हमलों के बाद किए गए हैं। वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआर्जीसी) ने कहा है कि कुवैत, बहरीन और क़तर के अमेरिका सैन्य ठिकानों पर किए गए उसके हमले अमेरिका को सीज़फ़ायर तोड़ने की सज़ा है और साथ ही अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर उसके हमले जारी रहे तो, ईरान क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाएगा। हमले के चंद घंटों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को भारी चोट पहुँचाने की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा कि ये हमले कल ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर जो बमबारी की थी, उसके जवाब में किए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा फिर हुआ, तो इसका जवाब इससे भी कहीं अधिक कठोर होगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, देश के दक्षिणी तटीय इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं और फ़ारस की खाड़ी में ईरान के नियंत्रण वाले द्वीपों को निशाना बनाया गया है।













