पीएम मोदी के निवास पर प्रदर्शन को लेकर शिंदे का आरोप
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब हम छात्रों के साथ हैं और छात्रों के हित में निर्णय लिए जाएंगे, ऐसा सत्तारूढ़ एनडीए की ओर से कहा जा रहा है। इसी इस्तीफे पर राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उनके आरोपों से राजनीतिक हलचल मच गई। खास बात यह रही कि उन्होंने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर भी बिना नाम लिए निशाना साधा। एकनाथ शिंदे ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए इस्तीफा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों की भावनाओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में छात्रों का आंदोलन गैर-राजनीतिक था, लेकिन उसे राजनीतिक आंदोलन बना दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग आंदोलन में कूद पड़े। लेकिन वे जंतर-मंतर के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निवास पर पहुंचे।
प्रधानमंत्री का निवास उच्च सुरक्षा क्षेत्र होता है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एसपीजी कानून बनाया गया था। तभी से प्रधानमंत्री के निवास परिसर में किसी भी प्रकार का आंदोलन करने की अनुमति नहीं है। राहुल गांधी को इसकी जानकारी थी, फिर भी जानबूझकर वहां आंदोलन किया गया। हजारों-लाखों लोगों को वहां बुलाया गया। शिंदे ने गंभीर आरोप लगाया कि राहुल गांधी का उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के निवास पर कोई बड़ी घटना करवाना था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का उद्देश्य बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसी अराजकता भारत में फैलाना था। यह निंदनीय है। विपक्ष के नेता को ऐसा नहीं करना चाहिए। हमने पहले भी दो प्रधानमंत्रियों को खोया है। मैं इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। विपक्ष के नेता होने के बावजूद वे लोगों से प्रधानमंत्री मोदी के निवास पर आने का आह्वान कर रहे थे। जबकि आंदोलन जंतर-मंतर पर था। मोदी के निवास पर आंदोलन करने के पीछे उनकी दुर्भावनापूर्ण मंशा थी। इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। आगे बोलते हुए उन्होंने उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। कुछ लोग महाराष्ट्र से दिल्ली गए। महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें नकार दिया है। वे दिल्ली में छात्रों के मंच पर जाकर भड़काऊ भाषा बोल रहे थे। वे कह रहे थे कि आग लगी है, उसे बुझने मत दो। उनका उद्देश्य देश में अराजकता फैलाना था। अब जब छात्रों ने आंदोलन वापस ले लिया है तो वे निराश हो गए हैं।
हमारा एजेंडा कुर्सी नहीं, गरीबों की सेवा
दापोली। एकनाथ शिंदे की शिवसेना एक बार फिर राज्य में सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। उनकी पार्टी ने शिवसेना आपके द्वार कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत कोंकण में एक सार्वजनिक सभा आयोजित की गई। इस सभा से एकनाथ शिंदे ने सत्ताधारियों पर जोरदार हमला बोला। साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे को फेसबुक लाइव करने वाले नेता बताते हुए आलोचना की। उन्होंने कहा कि हमारा एजेंडा कुर्सी नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन में खुशियां लाना है। दापोली में आयोजित कार्यक्रम में विपक्ष पर हमला बोलते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, 2022 में हमने जो बगावत की, उसकी पूरी दुनिया में चर्चा है। इतिहास में ऐसा विद्रोह कभी नहीं हुआ। लोगों को लगा कि ये लोग कभी चुनाव जीतकर नहीं आएंगे। मैंने उसी सदन में कहा था कि अगर कोई चुनकर नहीं आया तो मैं राजनीति से सन्यास लेकर खेती करूंगा। लेकिन आपके एकनाथ शिंदे ने चालीस विधायकों को साठ तक पहुंचाया। महाराष्ट्र की जनता ने हमें स्वीकार किया।
लाड़की बहनें, माताएं-बहनें, किसान, वारकरी- सभी के लिए हमने फैसले लिए। ढाई साल में लिए गए फैसले ऐतिहासिक हैं। इसी वजह से महाराष्ट्र में फिर महायुति की सरकार बनी। इसके लिए माता-बहनों और किसानों का जितना धन्यवाद किया जाए, कम है। उन्होंने आगे कहा, देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र को आगे ले जाने का काम कर रहे हैं। हमारा एजेंडा कुर्सी नहीं है। हमारा एजेंडा सत्ता नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन में खुशियां लाना और महाराष्ट्र को आगे बढ़ाना है। इसलिए हम इसी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। अब केवल मुंबई नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में इस तरह का कार्यक्रम चलाया जाएगा। सरकार की कई योजनाओं का लाभ उपलब्ध है, लेकिन लोगों के पास आवश्यक प्रमाणपत्र और दस्तावेज नहीं होते। इसलिए ये दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब शासन आपके द्वार कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को लाभ दिया। लोगों को मंत्रालय बुलाने के बजाय उनके पास जाकर लाभ पहुंचाया। प्रमाणपत्र और ट्रैक्टर भी वितरित किए। अब शिवसेना के द्वारा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, चाहे कितनी भी साजिशें हों, रामदास कदम शिवसेना को आगे बढ़ा रहे हैं। किसी में भी उन्हें झुकाने की हिम्मत नहीं है।










