न्यायमूर्ति भुइंया के बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा
लोकत्पाहिनी, संवाददाता
नागपुर। वोट देने के अधिकार पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइंया की टिप्पणी का हवाला देते हुए, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार को दावा किया कि देश में संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है और उनका अनादर किया जा रहा है। उनकी यह टिप्पणी जस्टिस भुइंया के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जो लाखों भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करती है, वह मूल रूप से मनमानी है और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है, जिसे किसी भी तरह की दलीलों से सही नहीं ठहराया जा सकता।
हैदराबाद स्थित ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ में आयोजित एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति भुइंया ने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो। इस पर उनकी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर सपकाल ने कहा, अब यह व्यापक रूप से ज्ञात है कि हमारे अधिकारों को कुचला जा रहा है। संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का अनादर किया जा रहा है और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने जो कहा है वह वास्तव में एक तथ्य है। कांग्रेस नेता ने नागपुर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस देश का मालिक प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि आम आदमी है, जिसके बारे में संविधान स्पष्ट रूप से बताता है।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर (मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण) रूपी जो बुलडोजर चल रहा है, उसका इस्तेमाल निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान के अधिकारों, शक्तियों और दलों को बाधित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। समाचारपत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ उस खबर के बाद कांग्रेस मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध रही है, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर बीते 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। अपने दो आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आए निर्वाचन आयोग ने कहा है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का हिस्सा होती हैं और उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त है तथा वे स्थापित संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
सत्याग्रह से दो दिन में 30 हजार प्रदर्शनकारी समूह जुड़े
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोमवार को दावा किया कि पार्टी सांसद राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए ‘सत्याग्रह’ मंच पर दो दिनों के भीतर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे लगभग 30,000 समूह जुड़े, जो “बढ़ते अधिनायकवाद” और भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ जनता के गुस्से को दर्शाते हैं। गांधी ने शनिवार को देश भर में चल रहे मुद्दे-आधारित विरोध प्रदर्शनों को एकजुट करने के लिए ‘सत्याग्रह’ डिजिटल मंच शुरू किया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मंच पर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करें, ताकि जहां कहीं भी सत्य को कुचला जा रहा हो, वहां लोगों की मदद सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के एक दिन बाद यह मंच शुरू किया। सोमवार से दिल्ली में महाराष्ट्र के किसानों के दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर, सपकाल ने कहा कि राहुल गांधी ने देश में चल रहे सभी आंदोलनों को एकजुट करने और समाधान तलाशने के लिए ‘सत्याग्रह’ मंच शुरू किया है। सपकाल ने दावा किया, वेबसाइट को अभी 48 घंटे भी पूरे नहीं हुए हैं, और देशभर से लगभग 30,000 आंदोलन और सत्याग्रह इस पर पंजीकृत हो चुके हैं।













