नागपुर। दुरुस्ती कार्य गुरुवार की देर रात तक पूरा होने के बाद शहर में जलापूर्ति आरंभ कर दी गई, लेकिन शहर के उत्तर नागपुर के नारा समेत अनेक इलाके में शुक्रवार की दोपहर तक जलापूर्ति नहीं हो पाई। वहीं दूसरी ओर मानेवाड़ा, बालाजी नगर परिसर में तीन दिनों बाद जलापूर्ति हुई, लेकिन कम दबाव से पानी आने के साथ ही दूषित और गंदा पानी नागरिकों को मिला। शहर में लीकेज दुरुस्ती के कामों को पूरा करने के लिए शटडाउन किया गया, लेकिन पूरे काम में जिम्मेदार मनपा अधिकारी गायब रहे। मनपा के स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की अधीक्षक अभियंता श्वेता बनोंजों को जमकर फटकार लगाई है। महापौर ने पूरे शहर में जलापूर्ति की समीक्षा कर ब्योरा देने का निर्देश भी दिया। जैसे-तैसे आधे-अधूरी काम को पूरा कर दिया गया है, लेकिन अब भी काम पूरा नहीं होने से सोमवार 12 अक्टूबर को शटडाउन करने की संभावना है।
महानगरपालिका के जलप्रदाय विभाग और ओसीडब्लू से शहर के मानकापुर परिसर में लीकेज दुरुस्ती के लिए 36 घंटों का शटडाउन में काम पूरा नहीं हो पाला। ऐसे में करीब 48 घंटों से अधिक सम्बंधि में नागरिकों को खासा परेशान होना पड़ा। पेयजल के साथ ही अन्य कामों के इस्तेमाल के लिए नागरिक अपने समीप के सार्वजनिक कुंए और बोरखेल को खोजते रहे। घरों में कूलरों के साथ ही अन्य इस्तेमाल के लिए बाल्टी लेकर भटकते रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर पेयजल के लिए भी नागरिकों को आरओ के केन लेते रहे। ओसीडब्लू की गैरजिम्मेदाराना कार्यप्रणाली से एक बार फिर शहर को पानी के लिए तरसने की नौबत आ गई है। सोमवार को शटडाउन की संभावना वर्ल्ड बैंक डिवीजनों की दुरुस्ती कामों के निर्धारित समयावधि में पूरा नहीं होने से जलापूर्ति प्रभावित हो गई है। ऐसे में महानगरपालिका प्रशासन से अस्थायी तौर पर दुरुस्ती पूरी कर जलापूर्ति को आरंभ को गई है। ऐसे में मनपा के जलप्रदाय विभाग के मुताबिक 1400 एमएम के दो पाइप के लीकेज की वेल्डिंग करने के लिए सोमवार 12 अक्टूबर को फिर से शटडाउन किया जाएगा। शटडाउन के दौरान लीकेज की पूरी दुरुस्ती होगी।
कई लोगों को हुई भारी असुविधा
तीन दिनों तक पानी न मिलने के कारण कई घरों में पानी की टंकियां खाली हो गई हैं। स्कूलों और कॉलेजों में भी पानी का भंडार खत्म होने से समस्याएं उत्पन्न हुईं। सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों में पानी खत्म होने से कर्मचारियों को पीने के पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। सबसे बुरी स्थिति कक्ष सरकारी कार्यालयों में थीं, जहाँ शौचालयों के सभी नल सूखे पड़े थे। कई मॉल और सुपरमार्केट भी इस पानी की कमी से बुरी तरह प्रभावित हुए। कुछ जगहों पर आरओ पानी के केन मंगवाकर प्यास बुझाने का समय आया। शिक्षा और काम के लिए नागपुर में रह रहे कई युवाओं को पानी की आपूर्ति बंद होने की जानकारी नहीं थी। नतीजतन, उनके घरों में पानी खत्म होने के बाद उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
कारवाशिंग और औद्योगिक उपयोग पर भी प्रतिबंध
निर्माणकार्यों के लिए पेयजल का उपयोग करना अपराध
राज्य में सूखे जैसी स्थिति और जल संकट को देखते हुए नागपुर में पीने के पानी का कम से कम उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को शहर में जलसंकट को दूर करने के उपाय करने का आदेश दिया गया है और निर्माणकार्यों में पीने के पानी के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। इन कार्यों के लिए उपचारित जल का उपयोग करना अनिवार्य होगा। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने चेतावनी दी है कि पीने के पानी का अवैध उपयोग करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। बावनकुले ने बताया कि राज्य में सूखे की स्थिति के कारण सभी सड़क निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। विभिन्न क्षेत्रों में जल उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पेयजल का उपयोग केवल नागरिकों की आवश्यकताओं के लिए ही हो। निर्माण के लिए आवश्यक जल को उपलब्ध स्रोतों से संसाधित करके उपयोग किया जाएगा।
उद्योगों के लिए पीने का पानी उपलब्ध नहीं
कारवाशिंग वाले केंद्रों को भी पीने के पानी का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पीने के पानी का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। जल संकट की इस अवधि के दौरान, प्रशासन पीने की पानी की बर्बादी को रोकने के लिए उपलब्ध भंडारों की उचित योजना बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। नागपुर में जल संकट को दूर करने के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं और पीने के पानी के अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए कार्रवाई की जाएगी। इसलिए, निर्माण पेशेवरों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कार पुलाई केंद्रों को वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग करना होगा।














