मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि अल नीनो के कारण पड़े सूखे, फसलों को हुए भारी नुकसान और आने वाले महीनों में पेयजल तथा चारे की कमी की आशंका राज्य के सामने सबसे बड़ी तात्कालिक चुनौतियां हैं। फडणवीस ने एक कॉन्क्लेव में कहा कि राज्य की करीब 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ है और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए उपायों की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं, तो उन्होंने कहा, चुनौतियां हमेशा रहती हैं। हम एक विकासशील अर्थव्यवस्था हैं और ऐसी अर्थव्यवस्था में कोई न कोई चुनौती बनी रहती है। लेकिन अगर आप तात्कालिक चुनौती के बारे में पूछते हैं, तो मेरा मानना है कि इस साल अल नीनो के कारण पड़ा सूखा सबसे बड़ी चुनौती है। अल नीनो जलवायु की ऐसी स्थिति है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। भारत में इसके कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे अक्सर कम बारिश होती है और सूखे तथा लू का खतरा बढ़ जाता है।
फडणवीस ने कहा, महाराष्ट्र में करीब 75 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ है। आने वाले महीनों में पेयजल की समस्या भी हो सकती है और मवेशियों के लिए चारे की कमी भी हो सकती है। हम इन चुनौतियों से निपटने की तैयारी अभी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का 52 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र सूखे की आशंका वाला है, क्योंकि राज्य का बड़ा हिस्सा वर्षा-छाया क्षेत्र (ऐसा क्षेत्र जहां पर्वतों के दूसरी ओर स्थित होने के कारण अपेक्षाकृत कम वर्षा होती है) में आता है, जहां पर्याप्त बारिश नहीं होती।
18 और तहसीलें सूखाग्रस्त सूची में होंगी शामिल
राज्य सरकार ने राज्य में सूखा घोषित कर दिया है। साथ ही, नुकसान का जायजा लेने के लिए पंचनामा शुरू कर दिया गया है। इसके चलते यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बलीराज को जल्द ही आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार ने राज्य के 75 प्रतिशत तालुकों में सूखा घोषित किया था। कुछ तालुकों को इससे छूट दी गई थी। इस पर किसानों ने नाराजगी जताई थी। विपक्षी दलों ने भी सरकार की आलोचना की थी। इसके बाद, सरकार ने आखिरकार 18 तालुकों को सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल कर लिया है। इन नए सूखाग्रस्त तालुकों में भी पंचनामा आयोजित किया जाएगा, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
सरकार ने सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे तालुकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के 18 तालुकों में जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी है। पाँच प्रमुख फसलों के 20 प्रतिशत सर्वेक्षण के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। साथ ही, सूखाग्रस्त इन 18 तालुकों में सर्वेक्षण किया जाएगा। नांदेड, चंद्रपुर, गोंदिया, वर्धा, भंडारा, नाशिक, सातारा और सांगली जिलों के तालुकों को इन सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल किया गया है। सूखा घोषित करने के लिए सर्वेक्षण रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। 18 और तालुकों को सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या में जोड़ा जाएगा, जिनकी संख्या 265 है। इससे इन नए 18 तालुकों के किसानों को बड़ी राहत मिली है














