बांधों में घटा जलस्तर, मनपा ने बढ़ाये टैंकर
लोक्यवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। महाराष्ट्र में मानसून की विदाई के साथ जल संकट पैदा हो गया है। अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष राज्य में बारिश में काफी कमी आई है और जल संसाधन सीमित हो गए हैं। संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने 31 अगस्त 2027 तक के लिए विस्तृत जल योजना बनाई है। राज्य के नागरिकों को पीने के पानी की कमी का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सभी शहरी स्थानीय निकायों में 16 अक्टूबर से कम से कम 10 फीसदी जल उपयोग में कटौती लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अल नीनो के चलते इस साल कम बरसात का असर जिले के बांधों में दिखाई दे रहा है। जलापूर्ति के लिए जल उपलब्ध कराने वाले पांचों बड़े बांध में 61 फीसदी ही जलसंचय है।
हालातों को देखते हुए फिलहाल मनपा जलापूर्ति विभाग ने मौजूदा 36 टैंकों को बढ़ाकर 60 कर दिया है। शहर में प्रतिदिन जलापूर्ति के लिए 740 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। मनपा आयुक्त का दावा है कि जिला प्रशासन, जलसंपदा विभाग के साथ संयुक्त उपाय योजना तैयार किया गया है। जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर महानगरपालिका क्षेत्र में जलकटौती समेत अन्य उपाय लागू होंगे। इस बीच शहर में नागरिक जलसंकट की गंभीरता को देखे बगैर धड़ल्ले से पानी की बर्बादी कर रहे हैं। पेंच बांध में तोतलाडोह, नवेगांव खिरी और खिंडसी का समावेश है। तीनों बांधों की कुल जलसंचय क्षमता 1261.91 दशलगमी है। पिछले साल 30 सितंबर को कुल जलसंचय क्षमता 1250.49 दशलगमी (99.09 फीसदी) मौजूद थी, जबकि इस साल 30 सितंबर तक 746.03 दशलगमी (59.12 फीसदी) जलसंचय उपलब्ध है। ऐसे में करीब 504.46 दशलगमी (40 फीसदी) की कमी बनी हुई है। महानगरपालिका को जलापूर्ति के लिए नवेगांव खिरी और कन्हान नदी से जल उपलब्ध कराया जाता है। प्राथमिकता से जलापूर्ति के लिए जलसंपदा विभाग से अगस्त 2027 तक के लिए 260 एमएमक्युब जल आरक्षण किया गया है। दूसरी प्राथमिकता के रूप में औद्योगिक इस्तेमाल के लिए 40 एमएमक्युब समेत 10 फीसदी वाष्पीकरण के रूप में आंकलन किया गया है। जलसंपदा विभाग ने नागरिकों से जल दुरुपयोग को रोकने का आह्वान किया गया है।
पेयजल से चल रहे निर्माणकार्य शहर में हजारों मकान निर्माण के कार्य चल रहे हैं। शहरी सीमा में प्रधानमंत्री आवास योजना व करीब 2000 निजी भवन निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन भवनों में भी बड़ी मात्रा में पानी खर्च हो रहा है। शहर में अभी भी धड़ल्ले से पेयजल से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन पानी की बर्बादी पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। शहर में कई वाशिंग सेंटर है। यहां एक दिन में करीब 75 हजार लीटर पानी की बर्बादी होती है। यह पानी यदि लोगों को मिलता है तो एक वार्ड से अधिक लोगों पीने का पानी मिल सकता है।
दीर्घकालिक उपाय योजना पर करें कार्य
कई बार जब इस तरह के संकट आते हैं, तो अल्पकालिक उपाय ही अपनाए जाते हैं, क्योंकि मुख्य ध्यान संकट को टालने पर होता है। दीर्घकालिक समाधानों पर शायद ही कभी ध्यान दिया जाता है। दीर्घकालिक समाधान ही किसी भी प्रकार की पर्यावरणीय आपदाओं को हल करने की कुंजी है। अधिकारियों को अपने जल आपूर्ति संसाधनों को बढ़ाने और उनमें विविधता लाने पर ध्यान देने और साथ ही नागरिकों में जल संरक्षण प्रथाओं को बढ़ावा देने पर भी काफी जोर देने की आवश्यकता है।
शुरुआत को अंत की न ले जाए
अभी गंभीर जल संकट की स्थिति नहीं है परन्तु आने वाले समय में जल संकट से शहर के लोगों, स्कूलों, अस्पतालों, होटलों, रेस्तरां, अग्निशमन विभाग, कार्यालयों और आवासीय समितियों पर प्रभाव डाल सकता है और यह परिणाम संकट के चरम पर फरवरी, मार्च और अप्रैल के माह के दौरान सामने आने की संभावना है। संकट से निपटने के लिए सरकार द्वारा कुछ अल्पकालिक कदम उठाए जा रहे हैं परन्तु नागरिक जब तक सुजान नहीं हो जाता तब तक ऐसे संकटों से निपटना मुश्किल है।











