नागपुर में 10,000 टन एल्युमिनियम प्रेस के भूमिपूजन अवसर पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी 1947 में थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है। उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात तेजी से बढ़ा है। अब देश अपनी जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम कर रहा है। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, पारंपरिक युद्ध और उसके तरीके आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने 1947 में थे। उन्होंने जोर दिया कि साल 2047 में भी इनकी अहमियत बनी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध छिड़ने पर सप्लाई चेन टूट सकती है। ऐसी स्थिति में हर देश चाहता है कि जरूरी सामान का निर्माण अपने ही देश में हो। जो राष्ट्र अपनी जरूरतें खुद पूरी करता है, वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भले ही युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा हो, सीमाएं धुंधली हो रही हों और दुश्मन बिना दिखाई दिए किसी देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन पारंपरिक युद्ध और सैन्य साधनों का महत्व अभी भी बरकरार है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 1947 में जैसे पारंपरिक युद्ध महत्वपूर्ण थे, वैसे ही 2047 में भी उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चुनौतियों के बावजूद किसी भी देश की सुरक्षा में मजबूत सैन्य औद्योगिक आधार की भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रहने वाली है। राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाना और सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना भारत की रणनीतिक जरूरत है। उनके मुताबिक मजबूत रक्षा उद्योग ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। उन्होंने आगे कहा कि 2021 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद सरकार का स्पष्ट लक्ष्य था कि नई इकाइयों को पूरी स्वायत्तता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को नवाचार, जोखिम लेने, अनुसंधान और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया गया।
■ रक्षा उत्पादन में हुई बढ़ोतरी
उन्होंने सैन्य औद्योगिक आधार को भविष्य के लिए बहुत जरूरी बताया। राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा प्रगति के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि साल 2014 में भारत का रक्षा उत्पादन केवल 46,000 करोड़ रुपये था। साल 2025-26 में यह बढ़कर 1,78,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात में भी बड़ी बढ़त हुई है। साल 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ 1,000 करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में उभर रहा है। देश अब अपनी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
■ इम्पोर्ट पर निर्भरता में कमी से घरेलू सप्लाई चेन होगी मजबूत
उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट जरूरी एल्युमिनियम एक्सट्रूजन के इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक्सट्रूजन प्रेस देश के इम्पोर्ट पर निर्भरता से घरेलू स्तर पर जरूरी सामान बनाने के नजरिए में बदलाव को दिखाता है और कहा कि यह प्रेस देश में अपनी तरह की सबसे एडवांस्ड सुविधाओं में से एक होगी। यह डिफेंस सिस्टम और प्लेटफॉर्म, एयरोस्पेस और डिफेंस स्ट्रक्चर, मिसाइल प्रोग्राम, रेलवे और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर और दूसरे स्ट्रेटेजिक इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए जरूरी बड़े और कॉम्प्लेक्स एल्युमिनियम एलॉय प्रोफाइल बनाने में मदद करेगा। राजनाथ ने कहा, यह एक्सट्रूजन प्रेस एक बहुत जरूरी जरूरत को पूरा करता है, मॉडर्न फाइटर जेट, मिसाइल और एडवांस्ड स्पेस प्रोग्राम के लिए ऐसे मेटल की जरूरत होती है जो हल्के और मजबूत हों, और सबसे मुश्किल हालात का भी सामना कर सकें। ऐसे मेटल खास प्रोसेस से बनाए जाते हैं, अगर मेटल की क्वालिटी बेहतर है, तो यह हर हालात में अच्छा काम करेगा।










