नागपुर-तुलजापुर-नांदगव्हाण मार्ग पर अवैध परिवहन करते दो ट्रक पकड़े, आठ लोगों के खिलाफ केस
लोकवाहिनी, संवाददाता
यवतमाल। दिवाली के त्योहार के बीच गरीबों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन के चावल की कालाबाजारी का गंभीर मामला सामने आया है। यवतमाल जिले के महागांव तहसील में स्थानीय अपराध शाखा और महागांव पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 440.73 क्विंटल चावल और दो ट्रक जब्त किए हैं। जब्त किए गए माल की कुल कीमत करीब 54 लाख रुपये बताई गई है। इस मामले में ट्रक चालकों, मालिकों और चावल के मालिकों सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
स्थानीय अपराध शाखा के पुसद कैंप दल ने नागपुर-तुलजापुर मार्ग पर ट्रक क्रमांक MH-26-BE-1821 को रोका। जांच के दौरान ट्रक में बड़ी मात्रा में चावल की बोरियां मिलीं। चालक अंबादास नंदू व्यवहारे से चावल की खरीदी की रसीद, बिल्टी और परिवहन का वैध परमिट मांगा गया, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने ट्रक जब्त कर तहसील प्रशासन से अनाज की जांच कराई। जांच में ट्रक में मौजूद 194.96 क्विंटल चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली का होने की पुष्टि हुई। इस मामले में चालक अंबादास व्यवहारे, शेख शौकत शेख महताब और देगलूर निवासी वाजिद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
दूसरी कार्रवाई में 245 क्विंटल चावल जब्त
दूसरी कार्रवाई महागांव पुलिस ने महागांव-नांदगव्हाण मार्ग पर की। नांदगव्हाण के पास ट्रक क्रमांक MH-26-AD-1778 संदिग्ध स्थिति में मिला। पुलिस ने चालक मोहम्मद खलील मोहम्मद शफी से चावल के परिवहन संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई वैध कागजात नहीं दिखा सका। इसके बाद ट्रक को जब्त कर तहसील प्रशासन से जांच कराई गई। जांच में ट्रक से 245.77 क्विंटल चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली का पाया गया। इस मामले में चालक मोहम्मद खलील, ट्रक मालिक शेख अतिक शेख खदीर तथा चावल के मालिक रोहित श्यामसुंदर गोयंकार, बालाजी व्यंकटराव जाधव और हरजी संभाजी राजेगोरे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
दोनों कार्रवाइयों में कुल 440.73 क्विंटल चावल और दो ट्रक जब्त किए गए हैं। पहली कार्रवाई में जब्त सामग्री की कीमत लगभग 27 लाख रुपये, जबकि दूसरी कार्रवाई में 27 लाख 445 रुपये बताई गई है। इस तरह कुल जब्ती का मूल्य करीब 54 लाख रुपये है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाला सरकारी राशन इतनी बड़ी मात्रा में कालाबाजारी के लिए ट्रकों तक कैसे पहुंचा? यह अनाज किन राशन दुकानों से निकाला गया? इसकी आपूर्ति श्रृंखला में कौन-कौन शामिल हैं? क्या इस पूरे कारोबार के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल ट्रकों को पकड़ने की नहीं, बल्कि राशन की कालाबाजारी के पीछे सक्रिय पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने की है।
















