लोस की कार्य उत्पादकता 19 प्रतिशत रही, रास में 39 फीसदी कामकाज, दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। लोकसभा की कार्यवाही बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई और मॉनसून सत्र में निचले सदन की कार्य उत्पादकता 19 प्रतिशत रही, वहीं इस बार एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा में लगातार गतिरोध बना रहा। इसे दूर करने के लिए विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच आज तक सहमति नहीं बन पाई। मानसून सत्र के दौरान केवल 28 और 29 जुलाई के दौरान सदन में सामान्य माहौल देखने को मिला जब लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026′ पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई। संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र आज खत्म हो गया। रिजिजू ने बताया कि मानसून सत्र के
राज्यसभा में सभापति ने जताया खेद
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में बार-बार हुए व्यवधान पर गहरी चिंता जताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इससे सदन का कामकाज प्रभावित हुआ। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए राधाकृष्णन ने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च संसदीय परंपराओं के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आग्रह किया। बीस जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा की उत्पादकता महज 39 प्रतिशत रही। हालांकि, व्यवधानों के बीच सदन ने 12 विधेयकों पर विचार किया और उन्हें पारित या वापस किया। राधाकृष्णन ने कहा, राज्यसभा के 271वें सत्र के समापन पर मैं इसकी कार्यवाही को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता हूं। दौरान राज्यसभा की कुल कामकाज 39 फीसदी रहा।













