कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने को विधायक साजिद खान पठाण का ज्ञापन
लोकवाहिनी, संवाददाता
अकोला। बारिश के लंबे अंतराल के कारण खरीफ फसलें संकट में आ गईं हैं। कई क्षेत्रों में फसलें सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। अकोला जिले को सूखाग्रस्त अथवा सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग अकोला पश्चिम के विधायक साजिद खान पठाण ने की है। इस संबंध में उन्होंने राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने की उपस्थिति में फसल स्थिति की समीक्षा बैठक और खेतों का दौरा आयोजित किया गया था। इसी दौरान विधायक पठाण ने अकोला जिले में बारिश की स्थिति, खरीफ फसलों पर पड़े प्रभाव तथा किसानों की आर्थिक परेशानियों की ओर कृषि मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले करीब दो महीनों से जिले में बारिश बेहद कम हुई है। बारिश में लंबे अंतराल का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। फसलों की अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से उत्पादन में भारी कमी की आशंका है। पहले से बढ़ी हुई उत्पादन लागत और बारिश की अनिश्चितता के कारण किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
विधायक पठाण ने केवल कागजी समीक्षा करने के बजाय खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने और वस्तुनिष्ठ पंचनामा व आवश्यक सर्वेक्षण कराने की मांग की है। बारिश में हुए अंतराल और फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कर उसके आधार पर किसानों को शासन के नियमानुसार मुआवजा देने की मांग भी उन्होंने की। सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के साथ ही सभी किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी करने की मांग ज्ञापन के माध्यम से की गई है। विधायक पठाण ने कहा कि फसल नुकसान बढ़ने की स्थिति में किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सूखे जैसी स्थिति के बावजूद सरकार की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अकोला जिले की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेकर सूखा घोषित करने तथा शासन के लागू मानदंडों के अनुसार सूखा राहत, फसल नुकसान मुआवजा और अन्य रियायतें उपलब्ध कराने की मांग की।
‘मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज करेंगे’
विधायक साजिद खान पठाण ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर सरकार ने तत्काल ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा, “तत्काल सूखा घोषित कर किसानों को पर्याप्त सहायता दें, अन्यथा मंत्रियों को राज्य में घूमने नहीं देंगे।” कृषि मंत्री के अकोला दौरे की पृष्ठभूमि में अब जिले में बारिश, फसल की स्थिति और वास्तविक नुकसान का सरकारी स्तर पर कितना वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाता है तथा उसके बाद सरकार क्या निर्णय लेती है।
अकोला की सूखा समीक्षा बैठक में अधिकारी मोबाइल में व्यस्त
अकोला। हिंगोली में शनिवार को हुई सूखा समीक्षा बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों के काजू-बादाम खाने का मामला चर्चा में रहने के बाद अब अकोला में भी प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं। रविवार को कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने की अध्यक्षता में आयोजित अमरावती संभागीय समीक्षा बैठक के दौरान कुछ अधिकारी मोबाइल फोन में व्यस्त नजर आए। इसको लेकर प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के ठाकरे सभागार में अमरावती संभाग की सूखा प्रभावित स्थिति और फसल नुकसान को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने ने की। बैठक में जलसंर्धन मंत्री संजय राठौड़, श्रम विभाग के मंत्री, अकोला जिले के पालकमंत्री आकाश फुंडकर, आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और सार्वजनिक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री इंद्रनील नाईक उपस्थित थे। स्वास्थ्य विभाग की राज्यमंत्री मेघना बोर्डिकर ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुईं। अमरावती संभाग के विभिन्न दलों के सांसद और विधायक भी बैठक में मौजूद थे। बैठक चल रही थी, उसी दौरान कुछ अधिकारी मोबाइल फोन देखते हुए नजर आए। आरोप है कि कुछ अधिकारी व्हाट्सऐप तो कुछ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म देखने में व्यस्त थे। सूखा और फसल नुकसान जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा के दौरान अधिकारियों के इस तरह मोबाइल में व्यस्त रहने को लेकर नाराजगी जताई जा रही है। एक ओर कृषि मंत्री की ओर से किसानों की समस्याओं को समझने और आवश्यक निर्णय लेने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर समीक्षा बैठक में कुछ अधिकारियों के मोबाइल इस्तेमाल करने नजर आने से प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े हुए हैं। सूखे की परिस्थितियां, फसल नुकसान और किसानों को राहत देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय के लिए आयोजित बैठक से पूरी गंभीरता के साथ चर्चा में शामिल होने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में सामने आए इस दृश्य को लेकर किसानों और आम लोगों में नाराजगी व्यक्त की जा रही है।












