एंटी इनकंबेंसी सभी दलों के साथ हुई, लेकिन मोदी के साथ नहीं
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग में मतभेद की खबरों के बीच बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली को नष्ट करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार देशद्रोही हैं तथा आने वाले समय में शाह तथा मोदी को इसके लिए जांच का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, एसआईआर और वोटर लिस्ट से जुड़े विवादों पर गुरुवार को 55 मिनट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राहुल ने कहा कि भारत में मौलिक बल है जिसे एंटी इनकंबेंसी कहा जाता है जो कि काफी जल्दी किसी भी सरकार के प्रतिरोध में खड़ी हो जाती है। इससे कोई नहीं बचता। इंदिरा गांधी जी बांग्लादेश युद्ध जीत जाती हैं। वे अपने लोकप्रियता के चरम पर होती हैं और इसके बाद सिर्फ दो-तीन साल में ही उनके खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी पैदा हो जाती है। ऐसा कई और कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के साथ होता है। लेकिन यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत किसी भाजपा नेता के साथ आज नहीं होता।
राहुल गांधी ने कहा कि वह बिना आधार के कोई बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने दावों को सबूत के साथ सामने रखा है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह 100 प्रतिशत स्पष्ट है कि भारत के चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी चुनावों में धांधली की। वोट चोरी से लोकतंत्र कमजोर हुआ है। राहुल ने पहले की तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया था। उन्होंने आयोग को सरकार की बी टीम भी कहा था। भाजपा के साथ वोट चोरी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 50 साल से लगातार अलग-अलग सरकारों में रही एंटी-इनकंबेंसी खत्म हो जाती है। महाराष्ट्र में खत्म हो जाती है। गुजरात में नहीं रहती। कई और राज्यों में भी ऐसा ही होता है। हमें यह नहीं समझ आता है कि एंटी-इनकंबेंसी खत्म कैसे हो जाती है। लेकिन फिर समझ आता है कि इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। तब हमें दिखता है कि जहां लोकतंत्र नहीं होता, वहां एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती।
राहुल ने आगे कहा अगर आप वोट को खत्म कर दें तो हमारा संविधान भी तबाह हो सकता है। उसे अपनी ताकत नहीं मिलती, वह कार्य नहीं कर सकता। अगर हमारा संविधान तबाह हो जाए तो हमारे कानून अवैध हो जाते हैं और अगर कानून ही वैध न रहे तो संस्थान भी बर्बाद हो जाते हैं।














