अकोला। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता लागू हुआ तो देशभर के किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा और उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। किसानों के मुद्दों को लेकर एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। अकोला में शेतकरी जागर मंच द्वारा आयोजित ‘आसुड सभा’ को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि दिल्ली की सत्ता केवल आंदोलन की भाषा समझती है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर राकेश टिकैत का हमला
इसलिए किसानों को फिर से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान नेता तेजराव भाकरे ने की। इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी युद्धवीर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर नलावडे, सचिव रूपाली पाटील सहित अनेक किसान नेता उपस्थित थे।
राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि देश में केवल राजनीतिक सत्ता नहीं, बल्कि बड़े पूंजीपतियों का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हित में फैसले लेने के बजाय बड़े उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उनका दावा था कि किसानों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है और कृषि से जुड़े निर्णय भी किसानों के हित में नहीं लिए जा रहे हैं।
‘आंदोलन से ही होगा बदलाव’
टिकैत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों से निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि आंदोलन के माध्यम से वैचारिक परिवर्तन आएगा और सरकार को किसानों की मांगें मानने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश में पहले की तरह व्यापक किसान आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसमें सभी किसानों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। अपने संबोधन में टिकैत ने आरोप लगाया कि खेती को लगातार घाटे का सौदा बताकर किसानों को अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दूसरी ओर बड़े व्यापारी और उद्योगपति शहरों तथा राजमार्गों के आसपास की कृषि भूमि खरीद रहे हैं। उन्होंने इसे किसानों की जमीन उनसे छीनने की बड़ी साजिश बताया। सभा में युद्धवीर सिंह, चंद्रशेखर नलावडे और राजवीर जदौन ने भी अपने विचार रखे। वहीं प्रशांत गावंडे ने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अक्षय राऊत ने किया।













