महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, युवाओं को बहकाकर हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ने का खतरा
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। युवाओं को कट्टर विचारधारा की ओर मोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उग्र साहित्य के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। बम बनाने की जानकारी देने वाली किताबें, आतंकवादी संगठनों का प्रचार करने वाली पत्रिकाएं, ऑनलाइन माध्यम से प्रसारित होने वाला डिजिटल साहित्य और अन्य आपत्तिजनक सामग्री पर राज्य सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है और इस साहित्य को जब्त करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में कल गृह विभाग की ओर से शासन निर्णय जारी किया गया, और इस प्रतिबंध सूची में इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस, अल-कायदा, हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी संगठनों से संबंधित कुल 114 प्रकार के साहित्य शामिल हैं। मुंबई आतंकवाद विरोधी दस्ते की जांच और ऑनलाइन गतिविधियों पर रखी गई निगरानी से यह सामने आया था कि कुछ डिजिटल माध्यमों, गुप्त ऑनलाइन चैनलों और नेटवर्क के माध्यम से उग्र विचारों वाला साहित्य फैलाया जा रहा था। इस साहित्य के माध्यम से युवाओं की सोच बदलकर उन्हें हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ने का खतरा होने की बात सरकार ने कही है। आतंकवाद विरोधी दस्ते के अपर पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च 2026 को राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी।
देश की सुरक्षा, शांति और नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली कुछ किताबें, पत्रिकाएं, दस्तावेज, चित्र, छायाचित्र तथा अन्य साहित्य जब्त करने की सिफारिश इस रिपोर्ट में की गई थी। इसके बाद गृह विभाग ने कार्रवाई करते हुए कल शासन निर्णय जारी किया। आदेश के अनुसार सूची में शामिल किताबें, पत्रिकाएं, दस्तावेज, चित्र और डिजिटल स्वरूप का साहित्य जब्त किया जाएगा। जब्त किए जाने वाले साहित्य में इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस से संबंधित ‘वॉइस ऑफ खुरासान’ पत्रिका का बड़े पैमाने पर समावेश है। यह पत्रिका ‘अल अज़ाइम मीडिया’ से संबंधित है और इसे आईएसआईएस, इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत और आईएसआईएस के जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ बताया गया है। इस पत्रिका के पहले अंक से लेकर 26वें अंक तक तथा उसके बाद के विभिन्न अंकों सहित कुल 47 अंक जब्ती के दायरे में लाए गए हैं। हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन और हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन पीर पंजाल रेजिमेंट से संबंधित ‘द रेवोल्यूशनरी रिसर्जन्स’ इस प्रकाशन के अक्टूबर 2023 से दिसंबर 2025 तक के विभिन्न अंकों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा ‘काशमीर किफाह – रेजिमयन्स एंड करेज’ और ‘द सोल ऑफ रेजिस्टेंस’ जैसे प्रकाशनों को भी जब्ती की सूची में शामिल किया गया है।
अल कायदा से संबंधित प्रकाशनों पर भी प्रतिबंध
अल कायदा और अल कायदा इन इंडियन सब कॉन्टिनेंट यानी एक्यूआईएस से संबंधित ‘नवाई गजवा-ए-हिंद’ इस प्रकाशन के जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक के विभिन्न अंक भी जब्त किए जाएंगे। सरकार ने केवल आतंकवादी विचारों का प्रचार करने वाले साहित्य पर ही नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष हिंसा की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा जाने वाली तकनीकी जानकारी देने वाले साहित्य पर भी प्रतिबंध लगाया है। इसमें विस्फोटक पदार्थों की मूलभूृत जानकारी देने वाला साहित्य, पेट्रोल बम बनाने की जानकारी देने वाली किताबें, आत्मघाती रॉकेट बनाने की जानकारी देने वाला साहित्य, हाइड्रोजन पेरोक्साइड आधारित रासायनिक विस्फोटकों से संबंधित साहित्य और मुजाहिद्दीन विषैले पदार्थ मार्गदर्शिका शामिल हैं। ऑनलाइन माध्यम से प्रसार करना देश की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति के लिए खतरनाक सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के साहित्य की छपाई करना, बिक्री करना, वितरण करना, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना, संग्रहित रखना या ऑनलाइन माध्यम से प्रसारित करना देश की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए अब केवल मुद्रित किताबों और पत्रिकाओं पर ही नहीं, बल्कि वेबसाइटों, सोशल मीडिया, गुप्त संदेश प्रणाली के चैनलों और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले प्रसार पर भी कार्रवाई की जाएगी।












