सूखा निर्धारित करने के लिए तीन चरणों की कार्यप्रणाली तय की गई है : मकरंद पाटिल
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। अत्यधिक बारिश और बाढ़ के बाद अब राज्य के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सूखा घोषित करने के लिए संशोधित कार्यप्रणाली तय की है। इसलिए केवल बारिश कम हुई है, इस आधार पर सूखा घोषित न करते हुए वास्तविक स्थिति का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा, ऐसी जानकारी राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने दी। इस वर्ष ऐन बारिश के मौसम में बारिश के गायब हो जाने से सूखे जैसी स्थिति पैदा हुई है। इस पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया है। वर्षा की मात्रा के साथ फसल नुकसान, जल भंडार, भूजल स्तर, चारे की उपलब्धता और पीने के पानी की स्थिति की जांच करने के बाद सूखाग्रस्त गांवों के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। पिछले वर्ष अत्यधिक बारिश और बाढ़ से प्रभावित 1 करोड़ 54 लाख किसानों के सीधे खातों में 21 हजार 543 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई थी।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति
सूखे जैसी स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए राज्यस्तरीय तथा जिलास्तरीय सूखा निगरानी समितियां कार्यरत रहेंगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति काम करेगी और राज्यस्तरीय सूखा निगरानी समिति की अंतिम रिपोर्ट के बाद सूखा घोषित करने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। कृषि विभाग द्वारा राजस्व विभाग के साथ राज्य में सूखे जैसी स्थिति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही क्षेत्रीय दौरे करके स्थिति का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद आवश्यक उपायों के संबंध में सिफारिशें मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी।











