झारखंड में विधानसभा मार्च के दौरान बैरिकेडिंग तोड़ी, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी
लोकवाहिनी, संवाददाता
रांची। परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में प्रतियोगी परीक्षाओं के हजारों अभ्यर्थियों ने सोमवार को झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया. एक के बाद एक कई अवरोधकों को तोड़ते हुए आगे बढ़े छात्रों पर पुलिस ने पानी की बौछारें कीं. इस दौरान छात्रों की पुलिस के साथ दो बार झड़प भी हुई. कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई में वे घायल हो गए. यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब प्रदर्शनकारी नए विधानसभा परिसर की ओर जाने वाले मार्ग पर जगन्नाथ मंदिर के पास अंतिम अवरोधक तक पहुंचे थे. बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने की कोशिश की गई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है.
वहीं प्रदर्शन कर रही एक छात्रा ने पुलिस की ओर जूता-चप्पल फेंका. वहीं, अंतिम बैरिकेड पार करने का प्रयास कर रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इस दौरान छात्रों की ओर से किए गए पथराव में एक पुलिसकर्मी के सिर में चोट लगी, जिससे वह घायल हो गया. विधायक आवास के पास प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया. मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही. पीयूष कुमार सोनी नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा, लाठीचार्ज बहुत बर्बर था. हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन सरकार ने हम पर लाठियां बरसाईं. ये सिर्फ हमें शारीरिक चोट पहुंचा सकते हैं हमारी सोच को नहीं दबा सकते. उन्होंने दावा किया, कई छात्राओं को भी चोटें आईं.
पुलिस ने हमारे सिर, हाथों, चेहरे पर हर जगह मारा. हजारीबाग जिले से आए विक्रम कुमार ने दावा किया कि उनके सिर पर चोट आई है. उन्होंने कहा, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार हमारे साथ जो कुछ भी कर रही है वह ठीक नहीं है. हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे फिर आपकी पुलिस हम पर लाठियां क्यों बरसा रही थी? सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन था और इसी दिन प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा भवन के बाहर से सुबह करीब साढ़े 10 बजे मार्च शुरू किया. छात्रों ने प्रदर्शन के 17वें दिन अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए. इस मुद्दे पर नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) नेता देवेंद्रनाथ महतो एम्बुलेंस में बैठकर इस मार्च में शामिल हुए.
पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते गिरफ्तार
झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीसी) में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान की गई है. जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पिछले कुछ समय से सवाल उठते रहे हैं और मामले की जांच सीबीआई कर रही है.
छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग निंदनीय : राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को बातचीत करके समस्या का समाधान निकालना चाहिए. राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस भी शामिल है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में गांधी ने कहा कि कांग्रेस शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हिंसा की निंदा करती है, चाहे ऐसी घटना कहीं भी हुई हो. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, झारखंड के छात्रों के लिए मुझे यही कहना है कि हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हैं. हम नहीं रखता कि यह कहां हो रहा है, हम इसकी निंदा करते हैं. हम इसकी (हिंसा) सलाह नहीं देते, हम इसका समर्थन नहीं करते. हमें इसको लेकर कोई असमंजस नहीं है.
मुख्यमंत्री खुद संलिप्त हैं : देवेंद्रनाथ महतो
रांची में आंदोलन के आगे की रणनीति पर छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि ये सरकार के फैसले पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा, ये आवाज उन लाखों युवाओं का है जिसका भविष्य प्रतियोगी परीक्षा पर निर्भर है. ये आवाज कई मां और बहनों का त्याग है. कोई किसी के भेजने से नहीं आए हैं. कोई पॉलिटिकल भीड़ नहीं है. वाटर कैनन, टियर गैस और कंटीले बैरिकेडिंग का इस्तेमाल किया गया फिर भी हमने सरकार के खिलाफ नारा नहीं लगाया. कोई अश्लील शब्द नहीं निकला. झंडा सिर्फ तिरंगा रहा. मैं चलने की स्थिति में नहीं हूं. यहां के युवाओं के भविष्य का सौदा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ये सरकार कितनी डरपोक है. इससे ये बात साबित होता है कि मुख्यमंत्री खुद इसमें संलिप्त हैं और अगर इसकी जांच हुई तो जेल जाने वाले हैं. तभी इतने छात्रों की आवाज को नहीं सुना जा रहा है. मुख्यमंत्री को चिंता है कि अगर जांच में कोई फंसे.












