आक्रोश: कांग्रेस विचार जनजागृति अभियान के निषेध कार्यक्रम में उभरे स्वर
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं के साथ हुई देश को शर्मसार करने वाली घटना के विरोध में कांग्रेस विचार जनजागृति अभियान की ओर से विनोबा भावे केंद्र, सर्वोदय आश्रम, धरमपेठ में निषेध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अभ्यासक सुरेंद्र बुराड़े ने कहा कि मोदी राज में 10 साल में 150 पेपर लीक हुए, साढ़े 7 करोड़ युवाओं का भविष्य नीलाम् हुआ और 22 छात्रों ने आत्महत्या की। इसके विरोध में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्वक आंदोलन करने वाले छात्र-छात्राओं पर दिल्ली पुलिस और भाजपा के गुंडों ने सारी हदें पार करते हुए छात्रों के कपड़े फाड़े और उनके साथ बर्बरतापूर्वक व्यवहार किया। इस घटना पर संसद में चर्चा कराने की मांग को लेकर राहुल गांधी जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने गए, तब अध्यक्ष ने कहा, मैं सरकार से पूछकर बताता हूं। मजबूरन राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के निवास पर जाकर धरना देना पड़ा। वहां भी दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें घसीटते हुए जबरन पुलिस वैन में ठूँसकर पुलिस स्टेशन ले जाया। उनके साथ प्रियंका गांधी और कांग्रेस के सांसदों को भी अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में चार घंटे बैठाकर रखा गया।
डॉ. वंदना बेंजामिन ने कहा कि मोदी सरकार छात्रों को शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल हो गई है और जंतर-मंतर पर छात्राओं के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ है, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। संगठन के प्रवक्ता एड. शिरीष तिवारी ने कहा कि छात्रों के साथ मारपीट और कपड़े फाड़ने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने मेरा और अपना वक्त बर्बाद मत करो कहकर सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चीफ जस्टिस किसके दबाव में काम कर रहे हैं।
निषेध कार्यक्रम में प्राध्यापक विजय बारसे, रवि पराते, पूर्व नगरसेवक बाबा शेलके, वासुदेव ढोके ने गृहमंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अत्याचारी पुलिस व भाजपा के गुंडों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। संचालन संयोजक तनवीर अहमद ने किया। निषेध कार्यक्रम में विशेष रूप से आनंदसिंह ठाकुर, सुरेश वर्षें, ताराचंद हाडके, प्रकाश शेगांवकर, नसीम अनवर, सचिन वानखेड़े, सैयद फारूक, गजानंद यादव, रामप्रसाद गहरे, सुरेश हेडाऊ, प्रकाश साळुंके, भीमराव हाडके, राजेंद्र जांगड़े बाबा कुरहाडे आदि उपस्थित थे।










