पूर्व विधायक व्यास ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने महल स्थित अपने कार्यालय में मीडिया के सामने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अन्य पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पार्टी में संवाद की कमी है। कुछ लोग पीछे के दरवाजे से आये हैं और वे आज पार्टी में गब्बर बन बैठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अनिल सोले और मेरे खिलाफ जो भी कार्रवाई होगी, उसके लिए वे तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पार्टी हमारे साथ आए लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, देखते हैं ऐसा होता है या नहीं। गिरीश व्यास के भी अनिल सोले के समर्थन में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अन्य पदों से इस्तीफा देने से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। अनिल सोले ने पूर्व भाजपा विधायक गिरीश व्यास के कार्यालय में अपना प्रचार कार्यालय खोला। इस कार्यालय का शुक्रवार को आधिकारिक उद्घाटन भी किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि…
टस से मस नहीं हुए सोले, उम्मीदवारी कायम
भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल सोले ने नागपुर मंडल स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि तक समाधान निकालने के लिए बातचीत जारी थी। आवेदन वापस लेने की अंतिम तिथि दोपहर 3 बजे थी। कुल 54 आवेदन दाखिल किए गए थे। इनमें से 16 लोगों ने कल, 15 ने आज अपने आवेदन वापस लिए। इनमें स्वयंसेवक एड. रमण सेंगाड भी शामिल हैं। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल सोले के आवेदन पर था।
अनिल सोले के पीछे उनके पुराने वफादार कार्यकर्ता हैं। हाल ही में सोले का सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व विधायक गिरीश व्यास भी आयोजकों में शामिल थे। उन्होंने ही कार्यक्रम का संचालन भी किया। दिलचस्प बात यह है कि इस कार्यक्रम में कई पुराने वफादार कार्यकर्ता मौजूद थे।
भाजपा को झटका
गिरीश व्यास, जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष बच्छराज व्यास के पोते हैं। ये विधान परिषद के पूर्व विधायक हैं और नागपुर मनपा के पूर्व पार्षद भी रह चुके हैं। उन्होंने भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता का पदभार भी संभाला। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के करीबी माने जाने वाले गिरीश व्यास का अचानक पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विधानसभा के शिक्षक और स्नातक चुनावों में महाठबंधन में विद्रोह को रोकने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं भाजपा नेता गिरीश व्यास ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोले-कराले गुरुजी बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
नागपुर मंडल के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों में, भाजपा के पूर्व विधायक प्रो. अनिल सोले और एनसीपी शरद पवार के राज्य महासचिव नितेश कराले गुरुजी ने महाविकास आघाडी में बगावत कर दी है। भाजपा ने सुधाकर कोहले को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने मौजूदा विधायक अभिजीत वंजारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, इस बगावत ने पार्टी नेतृत्व के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है। अनिल सोले और नितेश कराले गुरुजी के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरने से चुनाव में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। सोले की उम्मीदवारी के कारण भाजपा के पारंपरिक मतदाताओं और कराले की उम्मीदवारी के कारण महा विकास आघाडी से जुड़े मतदाताओं के बीच विभाजन की चर्चा है।
हालांकि, इसका वास्तविक मतदाता की प्रतिक्रिया और मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा। इस चुनाव में पार्टी के प्रति वफादारी, उम्मीदवारी संबंधी निर्णय, स्थानीय स्तर पर संपर्क और स्नातक मतदाताओं की चिंताएं प्रमुख मुद्दे होंगे। चुनाव का मुख्य केंद्र यह भी होगा कि बागी उम्मीदवार आधिकारिक उम्मीदवारों के साथ प्रभावी ढंग से प्रचार कैसे करते हैं। सोले ने कहा कि उन्होंने शिक्षकों और समर्थकों के आग्रह पर नामांकन दाखिल किया है, जो पिछले 25 वर्षों से इस निर्वाचन क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सोले से उम्मीदवारी वापस लेने से इनकार करने के बाद भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार को आंतरिक चुनावों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद चंद्र पवार के राज्य महासचिव नितेश कराले गुरुजी ने पार्टी से आधिकारिक उम्मीदवारी की मांग की थी। कराले ने बताया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मौका न मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी के लिए काम किया।













