अभिनेत्री व सांसद हेमा मालिनी करेंगी शिरकत
लोकवाहिनी, संवाददाता
धापेवाड़ा। अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी धापेवाड़ा में नए वस्त्र उद्योग भवन का उद्घाटन करेंगी। हालांकि, इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण धापेवाड़ा में बनी हथकरघा साड़ियों का फैशन शो होगा। मुंबई की मॉडल्स इन साड़ियों को पहनकर प्रस्तुति देंगी। इससे उम्मीद है कि विदर्भ की पारंपरिक हथकरघा कला को आधुनिक फैशन के जरिए एक नई पहचान मिलेगी। यह पहल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के विचार से शुरू हुई है और कार्यक्रम शनिवार, 17 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे धापेवाड़ा (कलमेस्वर) में आयोजित किया जाएगा।
धापेवाड़ा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के नए भवन का उद्घाटन और हथकरघा उद्योग का शुभारंभ इस कार्यक्रम के प्रमुख पड़ाव होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, राज्यमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले तथा वस्त्र मंत्री संजय सावकरे भी उपस्थित रहेंगे। धापेवाड़ा में बनी हथकरघा साड़ियों को मुंबई की मॉडल्स द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। कैडिअन्स अकादमी भी इस पहल में भाग लेगी। प्रस्तुति में पारंपरिक बुनाई से बनी साड़ियों की सुंदरता, उनकी विशेषताओं और आधुनिक फैशन में उनके उपयोग पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आधुनिक उपभोक्ताओं तक पहुंचना है, ताकि वे हथकरघा साड़ियों को केवल पारंपरिक परिधान के रूप में न देखें। इस माध्यम से विदर्भ के उत्पादों के लिए एक व्यापक बाजार उपलब्ध कराना इसका लक्ष्य है।
नागपुर जिले के धापेवाड़ा और कलमेस्वर क्षेत्रों में बुनाई की एक पुरानी परंपरा है। यहां के बुनकर पीढ़ियों से अपनी कुशलता से वस्त्र बनाते आ रहे हैं। हालांकि, बदलते बाजार में टिकने रहने के लिए पारंपरिक बुनाई को आधुनिक डिजाइन, आकर्षक प्रस्तुति और बिक्री प्रणाली के साथ जोड़ना जरूरी है। गडकरी ने स्थानीय बुनकरों की कला को घरेलू और विदेशी बाजारों तक पहुंचाने, उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने और अगली पीढ़ी को इस व्यवसाय में अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस पहल को प्रोत्साहित किया है। धापेवाड़ा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के माध्यम से इस अवधारणा को लागू करने के प्रयास जारी हैं।
महिलाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केवल वस्त्र उत्पादन ही नहीं, बल्कि महिलाओं के कौशल को बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। इस पहल के तहत स्थानीय और विदर्भ की महिलाओं को हथकरघा प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया गया है। बुनाई की पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीकों और डिजाइनॉं के साथ मिलाकर महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, कितनी महिलाओं को रोजगार मिलेगा और इस उद्योग की उत्पादकता कितनी होगी, इसके सटीक आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं।
पाचगांव परियोजना से संबंध नागपुर और विदर्भ कभी हथकरघा वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध थे। इस परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से, गडकरी ने नागपुर जिले के पाचगांव में हथकरघा से संबंधित एक पहल शुरू की है। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्रदान करना, बेकार कपड़ों का पुनर्चक्रण करना और स्थानीय परिवारों को आय का स्रोत प्रदान करना है। यह कौशल प्रशिक्षण, स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और विक्रय प्रणाली से जुड़ाव पर केंद्रित है। धापेवाड़ा और पाचगांव में इस तरह की पहल पारंपरिक कौशल को संरक्षित करने, ग्रामीण रोजगार प्रदान करने और स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। हालांकि, इन प्रयासों की दीर्घकालिक सफलता उत्पादों की गुणवत्ता, उपभोक्ता मांग और नियमित विक्रय प्रणाली पर निर्भर करेगी। ‘परंपरा के धागे, समृद्धि की बुनाई’ की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए, धापेवाड़ा वस्त्र उद्योग का एक नया सफर शुरू हो रहा है। अब इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि आधुनिक बाजार में इन पारंपरिक साड़ियों को कितनी प्रतिक्रिया मिलती है और इससे स्थानीय बुनकरों की आय में कितनी वृद्धि होती है।












